तहसील का सुदूरवर्ती कुंवाली कस्बा भी विकास की मुख्य धारा से कट चुका है। यह कस्बा 12 ग्राम पंचायतों का मुख्य केंद्र है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां शौचालय तक नहीं है। कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने से जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। बैंक की शाखाएं नहीं होने के कारण लोग परेशान रहते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिला पंचायत की तरफ से कर तो वसूला जाता है, लेकिन सुविधाएं नहीं दी जाती।
कुंवाली कस्बा रानीखेत से 30 किमी की दूरी पर है। कस्बे में 80 दुकानें हैं, पागसा, सुतरगांव, ऐना, मल्यालगांव, बयेला, भिटारकोट, दैना, धनखोली, कुलसीबी, महतगांव, खोल्टा सहित 12 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों का यह मुख्य बाजार है, इसके बावजूद आज तक यहां राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा नहीं खुल सकी है। व्यापारियों और स्थानीय लोगों को बैंक संबंधी कार्यों के लिए 15 किमी दूर मजखाली अथवा 30 किमी दूर रानीखेत और बग्वालीपोखर जाना पड़ता है। बैंक के लिए लोग लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। पूर्व बीडीसी सदस्य राजेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि कस्बे में पेयजल की किल्लत नहीं हैं, लेकिन कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने के कारण जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। रानीखेत-बासुलीसेरा बस का संचालन बंद होने से सामान आदि लाने ले जाने में लोगों को भारी दिक्कतें हो रही हैं। कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का उच्चीकरण नहीं हुआ है। बालिकाओं को तीन से चार किमी दूर जाना पड़ रहा है। क्षेत्र सरकारी सुविधाओं से वंचित है।