त्रिभुवन गिरि महाराज को सम्मानित करते समिति के पदाधिकारी।
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विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि सरकार कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने के लिए प्रयासरत है। कुमाऊंनी भाषा, साहित्य, संस्कृति प्रचार समिति और कुमाऊंनी मासिक पत्रिका पहरू की ओर से जिला पंचायत सभागार धारानौला में आयोजित तीन दिनी कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन के समापन पर बतौर मुख्य अतिथि कुंजवाल ने कहा कि कुमाऊंनी भाषा को प्रदेश के सभी स्कूलों में लागू करवाने के प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि कुमाऊंनी भाषा, साहित्य के उत्थान के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है। साहित्यकार को सरकार के कामों की भी विवेचना करनी चाहिए। अध्यक्षता करते हुए एसएसजे परिसर अल्मोड़ा के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. जगत सिंह बिष्ट ने कहा कि कुमाऊंनी भाषा के विकास के लिए संगठित होकर काम करना पड़ेगा। वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार के पास गायक कैलाश खैर को गीत गाने के बदले दो करोड़ रुपए देने के लिए हैं, लेकिन कुमाऊंनी भाषा का संस्थान खोलने के लिए दो लाख रुपए तक नहीं हैं। उन्होंने साहित्यकारों और भाषा प्रेमियों की मांगों की उपेक्षा करने वाले राजनीतिक दलों का बहिष्कार करने का एलान किया।
इस मौके पर कुमाऊंनी भाषा संस्थान के निर्माण के लिए धनराशि एकत्र करने का निर्णय भी लिया गया। पहले ही दिन संस्थान के भवन निर्माण के लिए दो लाख से अधिक की धनराशि एकत्रित की गई। रिटायर्ड पुलिस अधीक्षक प्रेम सिंह सांगा, जिला पंचायत अध्यक्ष पार्वती मेहरा, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन सिंह मेहरा, वृक्ष मित्र किशन मलड़ा, चंद्र लाल वर्मा, पूरन कांडपाल, मोहन कबडवाल ने विचार रखे।