उत्तराखंड सेवानिधि में हुई प्रदेश स्तरीय संवाद 2016 में वक्ताओं ने कहा कि बढ़ते शहरीकरण से अनेक समस्याएं पैदा हो रही हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में बड़ी-बड़ी इमारतें बनने, अतिक्रमण से सिकुड़ते रास्ते, सड़कों में आवागमन के बढ़ते साधनों, कूड़े कचरे की समस्याएं आम हो गई हैं। बंदरों के आतंक से भी लोग परेशान हैं। समय रहते समाधान के प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले समय में लोगों का जीवन दूभर हो जाएगा।
पद्मविभूषण स्व. बीडी पांडे स्मृति समारोह समिति द्वारा आयोजित संवाद के दूसरे दिन प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ते शहरीकरण से पैदा हो रही सस्याएं और समाधान विषय पर चर्चा हुई। मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष पार्वती मेहरा ने प्राणियों का जीवन बचाने को हिमालय, शहरों और गांवों को बचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपनी बोली और संस्कृति को बचाने के भी प्रयास करने होंगे। अति विशिष्ट अतिथि डीएम सविन बंसल ने कहा कि शहरीकरण से उत्पन्न समस्याओं के निदान के लिए शासन द्वारा योजनाएं बनाई जा रही हैं।
कुछ समस्याएं इसलिए पैदा हो रही हैं कि हमने अपनी पुरानी संस्कृति परंपरा को भुला दिया है। सांस्कृतिक परंपराओं को पुनर्जीवित करना होगा। नौलों,े धारों के सुधार के लिए योनजाएं बनाई जा रही हैं। विशिष्ट अतिथि शहरी विकास विभाग के अपर निदेशक नवनीत पांडे ने स्मार्ट सिटी योजना, अमृत मिशन आदि योजनाओं की जानकारी देतेे हुए समस्याओं के समाधान प्रस्तुत किए। कार्यक्रम संयोजक पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने शहरीकरण से पैदा हो रही समस्याएं रखी। कार्यक्रम के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. ललित पांडे ने सभी का आभार जताया। संचालन डॉ. रमेश पांडे राजन ने किया। चर्चा में रंजन जोशी, केवल सती, मीता उपाध्याय, आशा डिसूजा, प्रमिला चटर्जी, अनुराधा पांडे, जंग बहादुर थापा, डॉ. डीके पांडे, ब्रिगेडियर केसी जोशी, कर्नल जेसी लोहनी, रेखा धस्माना, पीसी तिवारी, डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट, सभासद अशोक पांडे, कमल जोशी, मनोहर बृजवाल, पूरन चंद्र तिवारी, आनंद सिंह ऐरी, डॉ. हरीश जोशी, आशीष जोशी आदि ने भाग लिया। वहां एसडीएम विवेक राय, सभासद हेम तिवारी, लता पांडे, डॉ. पीसी पंगरिया, डॉ. चंद्र सिंह चौहान, डॉ. एचडी कांडपाल, प्रताप सत्याल, प्रो. जीएस नयाल आदि थे।