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भगीरथ प्रयासों से ही बच सकता है प्राचीन कुजगड़ का अस्तित्व: प्रो. रावत

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रानीखेत के तुड़िया सुयाल में कुजगड़ नदी के संरक्षण को लेकर विचार रखते प्रो. जेएस रावत। संवाद न्यू - फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। ताड़ीखेत ब्लॉक की सबसे प्राचीन कुजगड़ नदी के अस्तित्व को बचाने की मुहिम शुरू हो गई है। इसके लिए शुक्रवार को एनआरडीएमएस केंद्र अल्मोड़ा और होप संस्था की ओर से यहां तुड़िया सुयाल गांव में कार्यशाला हुई। इसमें मुख्य अतिथि एनआरडीएमएस के निदेशक प्रो. जेएस रावत ने कुजगड़ की पुनर्जनन प्रक्रिया बताई। कहा कि यह लंबी प्रक्रिया है। यांत्रिकी और जैविक गतिविधियों के माध्यम से इसे बचाया जा सकता है, इसके लिए जनप्रतिनिधियों और आम ग्रामीणों को भी दिलचस्पी लेनी होगी।
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प्रो. रावत ने कहा कि ब्लॉक की यह प्राचीन नदी अब सूखने की कगार पर है। सामूहिक प्रयासों से ही इसे बचाया जा सकता है। जलागम क्षेत्र में पौधरोपण के साथ ही यांत्रिकी का भी सहारा लेना होगा। कहा कि पानी की मात्रा बढ़ाने में आठ से 10 साल लगेंगे। होप संस्था के प्रमुख प्रकाश जोशी ने पिछले दो दशक में हुए प्रयासों के बारे में बताया। विधायक करन माहरा ने भी नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए अपनी ओर से भरपूर सहयोग का आश्वासन दिया। कहा कि वह अपनी विधायक निधि से भी सहयोग करेंगे। साथ ही इस मामले को विधानसभा में भी उठाने का आश्वासन दिया। ब्लॉक प्रमुख हीरा रावत ने कहा कि विकासखंड स्तर पर इसके लिए वृहद प्रयास चल रहे हैं। बताया कि पूर्व में ही कुजगड़ पुनर्जनन के लिए मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों को तीन लाख रुपये आवंटित कर दिए गए हैं। प्रो. रावत ने सभी को कुजगड़ पुनर्जनन की शपथ दिलाई। परियोजना अधिकारी धीरज भट्ट ने संचालन किया। इस दौरान जलागम क्षेत्र के 28 प्रधानों समेत जिला पंचायत सदस्य सुरेश फर्त्याल, डॉ. नरेश पंत, डॉ. अरविंद आदि रहे।
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