कोसी नदी के बैराज में जहां लोगों को नौकायन की सुविधा मिलेगी वहीं बैराज से निकलने वाले पानी का उपयोग बिजली उत्पादन में होगा। सरकार ने आधा मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए 4.50 करोड़ रुपए मंजूर कर दिए हैं। उत्पादित बिजली को ग्रिड में भेजा जाएगा। कोसी बैराज की यह बिजली योजना जिले की दूसरी पन विद्युत परियोजना होगी।
कोसी नदी में 33.80 करोड़ लागत के बैराज निर्माण का काम अंतिम चरण में है। 2016 के वर्षाकाल में पानी एकत्र होने के बाद बैराज की झील अस्तित्व में आएगी। इसके बाद दो किमी लंबी झील में में नौकायन और पानी से संबंधित अन्य खेल गतिविधियां संचालित करने की योजना है। बैराज निर्माण के समय ही यहां आधा मेगावाट बिजली उत्पादन भी प्रस्तावित था। बैराज का काम लगभग समाप्ति पर है। अब सरकार ने बिजली प्लांट लगाने को 4.50 करोड़ रुपए मंजूर कर दिए हैं। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता नवीन सिंघल ने बताया कि बिजली उत्पादन के लिए 250-250 किलोवॉट की दो टरबाइनें स्थापित की जाएंगी। बजट मिल जाने के बाद निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी। लक्ष्य है कि बैराज में पूरा पानी एकत्र होने के साथ ही बिजली का उत्पादन भी शुरू हो सके। उन्होंने बताया कि यहां उत्पादित होने वाली बिजली को ग्रिड में भेजा जाएगा।
मालूम हो कि जिले में इससे पहले उरेडा ने धौलादेवी ब्लॉक के तरुला में पनबिजली परियोजना बनाई है। कोसी बैराज की यह योजना दूसरी पनबिजली योजना होगी। इधर संसदीय सचिव मनोज तिवारी ने बताया कि शासन ने आगणन के अनुसार सिंचाई विभाग को बजट मंजूर कर दिया है। जल्द ही धनराशि अवमुक्त हो जाएगी। उन्होंने बैराज का काम निर्धारित समय पर पूरा होने पर संतोष जताया है।