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चार माह बाद अल्मोड़ा से केमू बसों का संचालन शुरू

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अल्मोड़ा। चार महीने बाद बुधवार को अल्मोड़ा केमू स्टेशन से बस सेवा का संचालन शुरू हो गया है। केमू की अल्मोड़ा-रानीखेत वाया शीतलाखेत बस को पहले दिन दस फीसदी सवारियां मिलीं। इस सेवा के शुरू होने से रानीखेत, शीतलाखेत, कठपुड़िया, द्वारसों और मजखाली आदि रूट के यात्रियों को राहत मिली है। 22 मार्च से सार्वजनिक वाहनों का संचालन बंद हो गया था। करीब 122 दिन बाद बुधवार को अल्मोड़ा स्थित केमू स्टेशन से अल्मोड़ा-रानीखेत-शीतलाखेत के लिए बस चली। केमू स्टेशन प्रभारी बीबी चंदोला ने बताया कि हल्द्वानी से केमू की बसों का संचालन हो रहा था लेकिन अल्मोड़ा से 22 मार्च से बसों का संचालन बंद था। उन्होंने बताया कि अल्मोड़ा केमू स्टेशन से भी बसों का संचालन शुरू हो गया है। बुधवार को अल्मोड़ा-रानीखेत वाया शीतलाखेत बस चली, जिसे दस फीसदी यात्री मिले। उन्होंने बताया कि अन्य रूटों पर भी बसों का संचालन करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इधर रोडवेज की सात बसें संचालित हो रही हैं। अल्मोड़ा-हल्द्वानी में छह, अल्मोड़ा-बागेश्वर वाया गरुड़ को पांच, अल्मोड़ा-बागेश्वर वाया ताकुला 14, अल्मोड़ा-अटपेसिया में तीन, अल्मोड़ा-टनकपुर पांच, अल्मोड़ा-मासी छह, अल्मोड़ा-हल्द्वानी के लिए आठ यात्रियों ने यात्रा की।
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पिथौरागढ़ के लिए आज से चलेगी केमू बस
बागेश्वर। तीन माह बाद केमू की बसों का संचालन शुरू तो हुआ लेकिन चालक, परिचालक सवारियों के लिए तरस रहे हैं। हल्द्वानी के बाद केमू संचालकों ने पिथौरागढ़ के लिए भी बस सेवा फिर से चलाने का निर्णय लिया है। बृहस्पतिवार सुबह सात बजे से बागेश्वर से पिथौरागढ़ के लिए बस रवाना होगी।
पहले पिथौरागढ़ के लिए वाया थल और वाया गंगोलीहाट दो बस सेवाओं का संचालन होता था। केमू स्टेशन के प्रभारी धरणीधर जोशी ने बताया कि हल्द्वानी के लिए दो बसों का संचालन किया जा रहा है। इनमें सवारियों की कमी है। मात्र दो या तीन यात्री ही मिल पा रहे हैं। लोग पिथौरागढ़ के लिए भी बस चलाने की मांग कर रहे थे। इसे ध्यान में रखते हुए फिलहाल गंगोलीहाट होकर पिथौरागढ़ के लिए बस सेवा शुरू की जा रही है। इसमें पिथौरागढ़ का किराया 540 रुपया होगा। यदि सवारियों की संख्या बढ़ी तो थल रूट से भी सेवा शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि सवारियां न मिलने का खामियाजा केमू कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार से उन्हें किसी भी प्रकार की मदद नहीं दी जा रही है। उनका कहना है कि सरकार को केमू कर्मचारियों की आर्थिक मदद करनी चाहिए।
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