चौखुटिया (अल्मोड़ा)। जौरासी-लखनपुर क्षेत्र में स्थित कत्यूरीकालीन ऐतिहासिक धरोहरें संरक्षण के अभाव में जर्जर होती जा रही हैं। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुरातत्व विभाग और राज्य सरकार से इन धरोहरों के संरक्षण, वैज्ञानिक सर्वेक्षण और पुनरुद्धार की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र की अमूल्य ऐतिहासिक विरासत विलुप्त हो जाएंगी।
क्षेत्र में स्थित प्राचीन लखनपुर कोट किला, रहस्यमयी सुरंगें और ऐतिहासिक मंदिर उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के महत्वपूर्ण प्रतीक माने जाते हैं। लेकिन उपेक्षा, प्राकृतिक क्षरण, अतिक्रमण और जागरूकता की कमी के चलते इनका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। सामाजिक कार्यकर्ता मोहन सिंह रौतेला और शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त दान सिंह रौतेला ने पुरातत्व विभाग को पत्र भेजकर क्षेत्र की धरोहरों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने तथा संरक्षण कार्य शुरू करने की मांग की है। उन्होंने लखनपुर क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया। मोहन सिंह रौतेला ने कहा कि इन धरोहरों का संरक्षण और प्रचार-प्रसार होने से क्षेत्र पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आर्थिक विकास के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों से इस ऐतिहासिक विरासत को बचाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया है।