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ऐसे तो बंद हो जाएगा पत्रकारिता कोर्स

Fri, 17 Nov 2017 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
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रोजगारपरक कोर्स खोलने के दस साल बाद भी सरकार ने पत्रकारिता विभाग में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की है। मानदेय पर रखे गए अतिथि शिक्षक छात्रों को पत्रकारिता का कोर्स पढ़ा रहे हैं। रेगूलर शिक्षकों के नहीं होने से विभाग में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या भी हर वर्ष कम हो रही है। इस बार यह संख्या 15 तक आ पहुंची है। 
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 वर्ष 2008 में इस उम्मीद के साथ जोर-शोर से कुविवि एसएसजे परिसर में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग खोला गया था कि कोर्स करने के बाद छात्रों को रोजगार भी मिल सकेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। दस साल हो गए विभाग में नियमित शिक्षकों के पद तक सृजित नहीं किए गए। हालांकि शुरूआत से कुछ सालों तक इसमें छात्र संख्या लगातार अच्छी रही।

करीब 25 से 30 छात्र-छात्राएं पत्रकारिता का कोर्स कर रहे थे, जिसमें से कई छात्रों को रोजगार भी मिला। लेकिन सरकार की ओर से कोई ध्यान नहीं दिए जाने के कारण विभाग की हालत बदतर होते गई। विभाग को नियमित शिक्षक तो नहीं मिले, लेकिन संविदा शिक्षकों के सहारे ही विभाग को चलाने की कोशिश की गई। अब हालात यह है कि नियमित शिक्षकों के नहीं होने से छात्र संख्या भी काफी कम हो गई है।
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वर्तमान में केवल 15 छात्र ही पत्रकारिता का कोर्स कर रहे हैं। इधर पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के समन्वयक प्रो. देवसिंह पोखरिया ने बताया कि रोजगारपरक कोर्स खुलने के बाद से ही विवि के माध्यम से लगातार सरकार से पद सृजित करने की मांग की गई, जिसमें विभाग ने एक प्रोफेसर, एक एसोसिएट और दो असिस्टेंट प्रोफेसर की मांग कई बार की है, लेकिन आज तक पदों का सृजन नहीं हो पाया।
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