रानीखेत का सिविल क्षेत्र का विहंगम दृश्य।
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निकाय चुनाव करीब हैं, लेकिन रानीखेत कैंट की सिविल एरिया को नगर पालिका बनाने का रास्ता साफ नहीं हो सका है। एक साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रानीखेत-चिलियानौला नगर पालिका की घोषणा की थी।
चिलियानौला नगर पालिका में चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। बताया जाता है कि रानीखेत के हिस्से को नगरपालिका में शामिल कराने का प्रस्ताव अभी तक राज्य सरकार ने रक्षा मंत्रालय को नहीं भेजा है। नगरपालिका में शामिल होने के लिए रानीखेतवासियों की हसरत इस बार भी पूरी होने की उम्मीद नहीं लग रही है।
रानीखेत का अधिकांश भाग छावनी परिषद का हिस्सा है। भूमि का मालिकाना हक तक नहीं मिल पाता। तमाम अभावों के चलते पूर्व में क्षेत्र से कई विभागीय कार्यालय अन्यत्र स्थापित हो गए, पर्यटन विकास पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
नागरिक 1977 से रानीखेत कैंट की सिविल एरिया के 161.551 एकड़ क्षेत्रफल को नगरपालिका बनाने की मांग कर रहे हैं। इस क्षेत्रफल में तकरीबन 15 हजार लोग निवास करते हैं। 1985 में रक्षा मंत्रालय ने कुछ भूमि का डीमार्केशन भी किया।
इसके बाद भी तमाम आंदोलन हुए, लेकिन सार्थक पहल नहीं हुई। गत वर्ष तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रानीखेत चिलियानौला नगर पालिका बनाने की घोषणा की, दरअसल कैंट क्षेत्र के समीप यदि कोई नगरपालिका अथवा पंचायत हो तो उसमें रक्षा की सिविल एरिया को शामिल करने का प्रावधान है।
इसके बाद प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेजा, लेकिन तत्कालीन और वर्तमान राज्य सरकारों ने यह प्रस्ताव अभी तक रक्षा मंत्रालय को नहीं भेजा है। इस वजह से रानीखेतवासियों की हसरत इस बार भी पूरी होती नहीं दिखती।