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झलां के ग्रामीण प्रस्तावित हवाई अड्डे के विरोध में

Sun, 05 Nov 2017 09:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चौखुटिया(अल्मोड़ा)।
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चौखुटिया के ग्राम पंचायत झलां में प्रस्तावित हवाई पट्टी के विरोध में नारेबाजी करते लोग। - फोटो : अमर उजाला
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ग्राम पंचायत झलां के ग्रामीण वायु सेना के प्रस्तावित हवाई अड्डे के विरोध में उतरने लगे हैं। इसको लेकर ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत में बैठक करने के बाद हवाई अड्डे के विरोध में नारेबाजी की। ग्रामीणों ने पीएम को संबोधित ज्ञापन भी तैयार किया है जिसमें जबरन हवाई पट्टी बनाने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है। ज्ञापन सोमवार को तहसील में सौंपा जाएगा। 
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ग्राम पंचायत झलां के ग्रामीण वायुसेना के प्रस्तावित हवाई अड्डे के विरोध में लामबंद होने लगे हैं। इसको लेकर ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत में बैठक करने के बाद हवाई अड्डे के विरोध में नारेबाजी की। ग्रामीणों का कहना है कि हवाई अड्डा बनने से उनकी उपजाऊ जमीन हाथ से चली जाएगी, जिससे उनके सामने रोजी रोटी की बड़ी समस्या पैदा हो जाएगी। 

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जबरन हवाई पट्टी बनाने का प्रयास किया गया तो ग्रामीण उसका विरोध करने के साथ ही अनशन और आमरण अनशन जैसे कदम उठाएंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश और केंद्र सरकार की होगी।
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विरोध करने वालों में प्रधान पूजा मेहरा, गोविंद सिंह, दानसिंह, कमला देवी, हेमा देवी, रजनी देवी, दिनेश वर्मा, उमेश सिंह, श्याम सिंह, कुंदन मनराल, प्रताप सिंह, कृपाल सिंह, जगत सिंह आदि शामिल थे। 

ये बिंदु लिखे गए हैं ज्ञापन में
झलां के ग्रामीणों द्वारा प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन में विभिन्न बिंदुओं की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि ग्राम झलां और हाट में प्रस्तावित हवाई अड्डे के लिए सेना के अधिकारियों द्वारा मौका मुआयना किया जा चुका है और वर्तमान में राजस्व विभाग द्वारा भूमि के सीमांकन का कार्य किया जा रहा है।

कहा गया है कि हवाई पट्टी के लिए न तो ग्राम वासियों को विश्वास में लिया गया न ही जनप्रतिनिधियों को कोई जानकारी दी गई। बताया कि क्योंकि प्रस्तावित स्थल कृषि क्षेत्र में प्रस्तावित है जिससे ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित होगी।

कहा गया है कि राजुला मालूशाई की पौराणिक कथा से जुड़ी यह एतिहासिक भूमि एक विरासत है। यदि हवाई पट्टी का निर्माण हुआ तो एक एतिहासिक धरोहर भी विलुप्त हो जाएगी।
ज्ञापन में आगे कहा गया है कि हवाई अड्डे के निर्माण से खेती के साथ ही करीब सौ आवासीय मकान भी इसकी चपेट में आ रहे हैं साथ ही ग्रामीणों के हकहकूक भी समाप्त हो रहे हैं।
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