जागेश्वर में जटा गंगा की आरती उतारते लोग।
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हरिद्वार की तर्ज पर प्रसिद्ध ऐतिहासिक जागेश्वर धाम में सोमवार की सायं से जटागंगा नदी के तट पर गंगा आरती शुरू हो गई है। आरती में मंदिर समिति से जुड़े पदाधिकारियों, पुजारियों और स्थानीय लोगों, भक्तों ने भाग लिया। अब प्रत्येक सोमवार को जटागंगा नदी के तट पर आरती होगी।
विश्व प्रसिद्ध जागेश्वर धाम का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। शरद नवरात्र की नवमी पर सोमवार की सायं 5:30 बजे जटागंगा नदी के तट पर गंगा आरती की गई। जिसमें मंदिर समिति के प्रबंधक प्रकाश चंद्र भट्ट, पुजारी कमल भट्ट, गिरीश भट्ट, नवीन भट्ट, गिरीश चंद्र भट्ट, शंभू दत्त, लीलाधर भट्ट, तारु भट्ट, पूरन भट्ट, देवकीनंदन भट्ट, खीमानंद भट्ट, प्रधान हरिमोहन भट्ट, नारद भट्ट, रामदत्त भट्ट, योगेश भट्ट, सोनू भट्ट आदि ने भाग लिया। फिलहाल गंगा आरती प्रत्येक सोमवार को होगी। मंदिर समिति के अध्यक्ष प्रकाश भट्ट ने बताया कि जल्द ही जटागंगा नदी के तट पर प्रतिदिन आरती करने की योजना है। इसके लिए आवश्यक संसाधन जुटाए जाएंगे और घाट का निर्माण किया जाएगा।
इधर इससे पहले दिन में मंदिर के पुजारियों ने रामनवमी पर जागेश्वर धाम में सामूहिक रूप से विश्व कल्याण के लिए रुद्राभिषेक और हवन किया। पं. कमल भट्ट ने बताया कि मां पुष्टि देवी की प्रेरणा से यह अनुष्ठान किया गया। उन्होंने बताया कि सभी पुजारियों ने तय किया है कि विश्व कल्याण के लिए प्रत्येक माह सभी पुजारी मिलकर यह धार्मिक अनुष्ठान करेंगे। अनुष्ठान में जागेश्वर धाम के सभी पुजारियों ने भाग लिया।