प्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने कहा कि जंगलों की आग पर काबू पाने के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं और वन विभाग इसके लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगा। सभी अधिकारियों को फील्ड में रहने को कहा गया है। वह खुद भी राज्य के भ्रमण पर निकले हैं। आग की घटना होने पर जरूरत के मुताबिक मजदूर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। वन पंचायतों को आग बुझाने के लिए 2.67 करोड़ रुपये रिलीज किए गए हैं और शीघ्र ही 3.50 करोड़ रुपये और दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वन विभाग में वन रक्षकों के 1400 पद खाली हैं इनमें से 1218 पद भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और छह माह के भीतर नियुक्तियां हो जाएंगी।
यहां पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि इस बार के सीजन में अब तक 1250 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग से प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि आग बुझाने के लिए वन विभाग की ओर से सभी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आग बुझाने के लिए बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी। हालांकि बजट उपलब्ध नहीं हुआ है, लेकिन अधिकारियों से कहा गया है कि आग की घटना होने पर जरूरत के हिसाब से मजदूर लगाएं। उन्होंने कहा कि वन पंचायतों के पास संसाधनों की कमी है। इसे देखते हुए वन पंचायतों में आग पर काबू पाने के लिए 2.67 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं और शीघ्र ही 3.50 करोड़ रुपये और दिए जाएंगे। हालांकि राज्य में 12089 वन पंचायतें हैं लेकिन आग बुझाने के लिए बजट वहीं दिया जाएगा जहां आग की घटनाएं होंगी।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वन विभाग में वन रक्षकों के कुल 3600 पद स्वीकृत हैं इनमें से 1400 पद खाली चल रहे हैं। यह भी बताया कि 1218 पदों में नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि बंदर एक बड़ी समस्या बन चुके हैं। राज्य में बंदरों की आबादी करीब 1.40 लाख हो चुकी है। बंदरों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए इनके बधियाकरण का अभियान चलाया जा रहा है। अल्मोड़ा और रानीबाग (नैनीताल) में भी बंदरों के बधियाकरण के लिए ऑपरेशन थियेटर भी बनाए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि तेंदुओं की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है और तेंदुए आए दिन मानव और पालतू मवेशियों पर हमला कर रहे हैं। तेंदुओं को रखने के लिए बाड़े आदि का निर्माण किया जाएगा। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि तेंदुओं द्वारा मवेशियों को मारने के संबंध में मुआवजा बांटने में एक दिक्कत यह भी आ रही है कि काफी संख्या में लोग फर्जी मामले दिखाकर मुआवजे के लिए आवेदन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चंपावत में गुलिया और लकड़ी के दोहन में अनियमितता के मामले में दोषी वन अधिकारियों के खिलाफ चार्ज शीट दाखिल हो चुकी है और अब संबंधित अफसरों का भी पक्ष पूछा जा रहा है।