अल्मोड़ा। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड आध्यात्मिक और नैसर्गिक सुंदरता के साथ ही पर्यटन की दृष्टि में भारत ही नहीं पूरे विश्व में अपना अलग स्थान रखता है। उन्होंने कहा कि जागेश्वर में स्थापित ज्योतिर्लिंग का वर्णन अनेक पौराणिक अभिलेखों में है। जागेश्वर के 125 मंदिर समूहों में स्थापित मूर्तियां वास्तुकला की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। जागेश्वर धाम की अपनी अलग पहचान है। मंदिर कमेटी और प्रशासन की ओर से यहां उपलब्ध कराई जा रहीं सुविधाओं का लाभ श्रद्धालुओं, पर्यटकों को मिलेगा। राज्यपाल ने जागेश्वर धाम में पूजा, अर्चना के बाद यह बात कही।
राज्यपाल रविवार शाम आरतोला पहुंचीं और वहां ईको विलेज रिजॉर्ट में रात्रि विश्राम किया। सोमवार सुबह उन्होंने ज्योर्तिलिंग जागेश्वर मंदिर समूह में जागनाथ, महामृत्युंजय आदि मंदिरों में विधि विधान के साथ पूजा, अर्चना की। उन्होंने कहा कि मंदिर समूह के पास वाहन पार्किंग, सार्वजनिक पार्क आदि मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने का प्रयास करना होगा। मंदिर समूह के निकट जो भी निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। उन्हें निर्धारित समय पर पूर्ण करने का लक्ष्य रखें।
राज्यपाल ने मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों से जानकारी ली और कहा कि मंदिर समूह के आसपास के क्षेत्र को भी विकसित करने की जरूरत है। इसके लिए पर्यटन और संस्कृति विभाग को समन्वय बनाकर सामूहिक प्रयास करने होंगे। जागेश्वर से लौटने के बाद राज्यपाल ने चितई गोल्ज्यू मंदिर पहुंचीं। वहां पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली और सुख-समृद्धि के लिए कामना की। मंदिर में राज्यपाल मौर्य ने देश और दुनिया से कोरोना समाप्ति और पीड़ितों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की भी प्रार्थना की।
डीएम नितिन सिंह भदौरिया से चितई में किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। राज्यपाल ने कहा कि मंदिर का सौंदर्यीकरण करने के साथ ही यहां देश-विदेश से आने वाले भक्तों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए विकास कार्य किए जाएं। डीएम ने उन्हें बताया कि चितई गोल्ज्यू देवता को न्याय के देवता के रूप में माना जाता है और यहां पर लोगों न्याय के लिए अर्जी भी लगाते हैं। डीएम ने बताया कि चितई मंदिर में भी जागेश्वर धाम की तरह समिति बनाकर विकास कार्य किए जाएंगे। इस दौरान उनके पति प्रदीप कुमार, राज्यपाल के एडीसी मुनीद सूद, रचिता जुयाल, एसएसपी पंकज भट्ट, सीडीओ नवनीत पांडे, एसडीएम सीमा विश्वकर्मा और मोनिका, जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भगवान भट्ट आदि रहे।