जागेश्वर की भूमि मामले में नया मोड़, सामने आया ट्रस्ट अध्यक्ष का परिवार, राजा की वसीयत के कई दस्तावेज मिले
अल्मोड़ा। जागेश्वर ट्रस्ट को चंद राजा आनंद सिंह ने 10 हजार नाली जमीन दान में दी थी। जागेश्वर ट्रस्ट की भूमि के मामले में नया मोड़ सामने आया है। तत्कालीन राजा आनंद सिंह के ट्रस्ट के अध्यक्ष रहे स्व. मुरलीधर पंत का परिवार भी इस मामले में सामने आया है, इसके पास ट्रस्ट और राजा की वसीयत संबंधी कई दस्तावेज मौजूद हैं।
बीते दिनों जागेश्वर के पुजारियों ने जमीनों और ट्रस्ट से संबंधित मामला कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत के समक्ष उठाया था। इसके बाद तत्कालीन ट्रस्ट अध्यक्ष स्व. मुरलीधर पंत का परिवार भी इस मामले में सामने आ गया है। स्व. मुरलीधर पंत के पौत्र डॉ. ललित पंत, पौत्रवधु अधिवक्ता नीतू के पास वर्ष 1940 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में राजा आनंद सिंह की वसीयत की पुष्टि होने संबंधित करीब 80 पेज के आदेश की एक प्रमाणित कॉपी समेत तमाम अन्य दस्तावेज मौजूद हैं। इनके मुताबिक जागेश्वर में पूजा-अर्चना, भंडारे और अन्य अनुष्ठानों सहित जनहित के कार्य संपन्न कराने के लिए राजा आनंद सिंह ने 1936 में एक ट्रस्ट बनाया था। मंदिर की व्यवस्थाओं के लिए राजा ने ट्रस्ट के नाम करीब 10 हजार नाली जमीन दान दी थी। बाकायदा राजा ने इसकी वसीयत भी लिखी है। स्व. पंत के परिजनों ने कहा कि मामले में वह आगे की रणनीति तय करने में जुटे हैं। संवाद
भूमि पर कोई नहीं जता सकता अधिकार
अल्मोड़ा। ट्रस्ट के दस्तावेजों के अनुसार राजा ने वसीयत में स्पष्ट किया है कि उस समस्त भूमि के स्वामी जागेश्वर होंगे। जागेश्वर को कोई पंडा, या उनका कोई कार्यकर्ता उस भूमि पर कभी भी हक नहीं जता सकता है। यहां तक की राजा ने भूमि से अर्जित आय से जागेश्वर में एक संस्कृत स्कूल और एक अस्पताल खोलने का भी प्रावधान रखा था। संवाद
आखिर कहां गया तीन महिलाओं का परिवार
अल्मोड़ा। राजा आनंद सिंह महाराज ने अपने ट्रस्ट में सरस्वती देवी, सुंदरी देवी, लाली देवी को भी रखा था। वसीयत में लिखा है कि नैनी पट्टी तल्ली सेवी पिथौरागढ़ निवासी सरस्वती देवी नर्स थी। सुंदरी देवी सरस्वती की पुत्री थी। इसके अलावा लाली देवी भी उस ट्रस्ट में थी। राजा ने ट्रस्ट में इन महिलाओं और उनके परिवारों के आजीवन खर्च की भी व्यवस्था का प्रावधान किया गया था। लेकिन अब इन तीनों महिलाओं के परिवारों का कोई अता-पता नहीं है।