जागेश्वर धाम क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जागेश्वर धाम में जटागंगा नदी में बैराज बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जिलाधिकारी को बैराज निर्माण के लिए आगणन तैयार करके शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं। जागेश्वर के विकास की महत्वाकांक्षी योजना 15 साल से अधर में है।
2003 में तत्कालीन केंद्रीय पर्यटन मंत्री जगमोहन ने स्वयं यहां आकर क्षेत्र के विकास की दीर्घकालिक योजना तैयार करवाई थी। इस योजना में जटागंगा नदी में झील निर्माण, सुविधा युक्त धर्मशाला, पार्किंग, आरतोला में भव्य स्वागत द्वार समेत अन्य जन सुविधाओं की स्थापना शामिल थी।
शासन ने कई बार सर्वे करके आगणन तैयार किए, लेकिन योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी। मंदिरों में दर्शन से पहले जटागंगा नदी में स्नान की धार्मिक मान्यता है। बरसात के अलावा अन्य महीनों में इस नदी का जल स्तर काफी घट जाता है। इससे श्रद्धालुओं को काफी दिक्कतें होती हैं। मंदिर से कुछ दूरी पर ही श्मशानघाट भी है।
पानी कम होने से शवदाह के बाद बचे कोयले, राख और अधजली लकड़ियों से नदी किनारे गंदगी रहती है। यहां बैराज बन जाने से जहां पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा वहीं शवयात्रियों सुविधा होगी और नदी किनारे जमा होने वाली गंदगी से भी निजात मिलेगी।
सीएम के जागेश्वर पहुंचने पर क्षेत्र के विधायक और विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने उन्हें जटागंगा नदी में मिनी बैराज बनाने का सुझाव दिया। सीएम ने इस प्रस्ताव पर हामी भरते हुए डीएम सविन बंसल को आगणन तैयार कर शासन को भेजने का निर्देश दिया।