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प्रधानमंत्री कार्यालय के आदेश के बाद डामरीकरण की जांच

Sun, 01 Oct 2017 10:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
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टाना-विशालकोट मोटर मार्ग के बारे में जानकारी हासिल करते एसडीएम। - फोटो : अमर उजाला
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 टाना-विशालकोट मोटर मार्ग के घटिया डामरीकरण कार्य को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। इधर प्रधानमंत्री कार्यालय से जांच के निर्देश के बाद एसडीएम की अध्यक्षता में गठित समिति ने डामरीकरण की जांच कर ली है। ग्रामीणों का आरोप है कि एडीबी ने डामरीकरण मानकों के अनुसार नहीं किया है, आठ किमी मार्ग पर डामरीकरण के लिए आठ करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन डामर दो दिन भी नहीं टिक सका, उनका कहना है कि जांच में कई स्थानों पर मिट्टी के ऊपर से डामर बिछा हुआ था। 
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मालूम हो कि 1977 में टाना-विशालकोट 29 किमी मोटर मार्ग को स्वीकृति मिली, लेकिन आज तक सिर्फ 10 किमी मोटर मार्ग का निर्माण हुआ है। इस सड़क से कपीना, जामण, धमाइजर, दीवारी, पांडेकोटा, जैंती, बित्थड़, टाना, विशालकोट सहित एक दर्जन से अधिक गांवों को लाभ मिलना था। सामाजिक कार्यकर्ता देवीदत्त बिष्ट ने बताया कि 2014 में आठ किमी मोटर मार्ग में डामरीकरण कार्य शुरू हुआ। इसके लिए लगभग आठ करोड़ रुपये स्वीकृत हुए, लेकिन डामर बिछाते ही उखड़ने लगा, इसके बाद उन्होंने मामले को लेकर शासन प्रशासन में पत्र व्यवहार किए, लेकिन कहीं से भी कोई जांच स्वीकृत नहीं हुई। कुछ माह पूर्व उन्होंने प्रधानमंत्री को जांच के बारे पत्र भेजा था, इसके बाद डीएम ने एसडीएम रजा अब्बास की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई।

एसडीएम के नेतृत्व में समिति ने गत दिवस सड़क में डामरीकरण की गुणवत्ता की जांच की। उन्होंने बताया कि जगह-जगह डामर उखड़ा पाया गया, दीवारें टूटी हुई थी। रोड़ी मानकों के अनुसार नहीं बिछाई गई है। अधिकांश हिस्से में डामर की गुणवत्ता खराब पाई गई है। उन्होंने कहा कि अब मामले में लीपापोती हुई तो वह न्यायालय की शरण में जाएंगे। निरीक्षण के दौरान ग्राम प्रधान विमल बिष्ट, जनार्दन पांडे, मनोज पांडे, विनोद पांडे, कमल आर्या,नरेश पांडे सहित तमाम ग्रामीण मौजूद थे। 
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