अल्मोड़ा। बीएसएनएल और केबल नेटवर्क पर जबरन गलती थोपना उपभोक्ता को महंगा पड़ा है। इंटरनेट कनेक्शन के माॅडम और फाइबर की धनराशि का भुगतान नहीं करने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने उपभोक्ता को 10 हजार रुपये फर्म को अदा करने का आदेश दिया है।
अनुबंध पर काम करने वाले बीएसएनएल और अल्मोड़ा केबल नेटवर्क ने रानीधारा निवासी सुमित खुल्बे के आवास पर जून 2020 को फाइबर इंटरनेट लगाया। संबंधित कर्मचारी ने मॉडम और फाइबर केबल के लिए चार हजार रुपये मांगे। उपभोक्ता ने पक्का बिल न देने का हवाला देकर भुगतान नहीं किया और कुछ दिनों के बाद इंटरनेट में खराबी की शिकायत की। संबंधित फर्म और बीएसएनएल ने फिर से भुगतान करने के लिए कहा लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो मॉडम वापस ले लिया गया।
उपभोक्ता ने बीएसएनएल कार्यालय में क्षतिग्रस्त लाइन और निजी मॉडम स्थापित करने के लिए प्रार्थनापत्र दिया। ऐसा करने के बाद भी उसका कनेक्शन संचालित नहीं किया गया। तब उसने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में एक लाख रुपये मानसिक और अन्य क्षतिपूर्ति दिलाने को लेकर वाद दायर किया। केबल नेटवर्क की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता आजाद खान ने बताया कि आयोग अध्यक्ष रमेश कुमार जायसवाल, सदस्य विद्या बिष्ट और सुरेंद्र चंद्र कांडपाल ने उपभोक्ता की ओर से दायर परिवाद को तकनीकी रूप से अपूर्ण पाया। इसे अस्वीकार करते हुए आयोग ने उपभोक्ता को केबल नेटवर्क को 10 हजार रुपये क्षतिपूर्ति अदा करने के आदेश दिए हैं। संवाद