सांस्कृतिक नगरी के युवाओं के स्मैक और चरस के नशे की चपेट में आने से समाज के सभी वर्ग के लोग चिंतित हैं। लोगों का कहना है कि पहले तो युवा शौक के तौर पर नशा करता है, लेकिन समय के साथ उसे नशे की लत लग जाती है। सामूहिक प्रयासों से जागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को सही मार्ग पर ले जाया जा सकता है।
युवा वर्ग को नशे से बचाने के लिए अधिक से अधिक रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाए। इसके साथ ही बाहरी क्षेत्र से हो रही नशीली वस्तुओं की तस्करी पर पुलिस कड़ाई से अंकुश लगाए। इसमें लोग भी पुलिस का सहयोग करें।
शौक बन जाता है लत
युवा पहले तो शौकिया तौर पर नशा करतें है, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें नशे की लत लग जाती है। बच्चों को नशे से बचाने के लिए उन पर विशेष ध्यान देना होगा। नशे से होने वाली हानियों से उन्हें अवगत कराएं। साथ ही पुलिस प्रशासन संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी करे, ताकि नशीली वस्तुओं की आपूर्ति और बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगाकर युवाओं का भविष्य संवारा जा सके।
संजय साह रिक्खू, पूर्व अध्यक्ष, नगर व्यापार मंडल अल्मोड़ा।
पुलिस, प्रशासन, समाज को बरतनी होगी सतर्कता
अल्मोड़ा में युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति का असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है। बाहर से स्मैक और चरस की आपूर्ति शहर में हो रही है और यह धंधा खूब फल-फूल रहा है। इसके लिए पुलिस, प्रशासन, समाज को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। अभिभावक बच्चों पर विशेष ध्यान दें।
सुरेंद्र लाल टम्टा, सचिव, उत्तराखंड पूर्व सैनिक लीग।
नशा किसी भी चीज का हो बुरा होता है
नशा किसी भी चीज का क्यों न हो बुरा होता है। नशे की गिरफ्त में फंसा युवा वर्ग न तो खुद को, न अपने परिवार, न समाज और न ही अपने देश को आगे ले जाने में सक्षम है। ऐसे में हर देशवासी का कर्तव्य है कि वह व्यक्तिगत रूप से नशे से दूर रहे। साथ ही युवा पीढ़ी को इसके दुष्परिणामों के बारे में चेताते हुए हर तरह के नशे का बहिष्कार करें।
मयंक तिवारी, प्रवक्ता, राजकीय इंटर कॉलेज अल्मोड़ा।
युवा वर्ग और बच्चों में नशे के प्रति बढ़तेे आकर्षण के कारणों को जानना होगा। शिक्षकों, अभिभावकों और समाज के सभी वर्गों को उन कारणों के निराकरण के प्रयास करने की आवश्यकता है। महत्वाकांक्षी युवा वर्ग सफलता के लिए शॉर्टकट रास्ता अपना रहा है। असफलता की कुंठा, कुसंगति, उचित मार्गदर्शन के अभाव में युवा नशे की लत में पड़ रहे हैं। काउंसलिंग कर, युवा क्लब बनाकर जागरूकता अभियान चलाना चाहिए।
दीपक पांडे, प्रवक्ता, राजकीय इंटर कॉलेज अल्मोड़ा।