मानिला (अल्मोड़ा)। राज्य स्थापना दिवस पर जीआईसी मानिला में हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में रचनाकारों ने कविता के माध्यम से जहां उत्तराखंड की व्यवस्थाओं पर तंज कसा वहीं देशप्रेम, वीर रस पर आधारित कविता सुनाकर श्रोताओं को बांधे रखा।
कवि ओमशरण आर्य ने हरा-भरा यह देश हमारा मिट्टी जिसकी चंदन है.., उप्र से आए आजाद कानपुरी ने हर तरफ खामोशियां छाने लगी, आहटें तूफान की आने लगी हैं, डा. दीनमोहम्मद्दीन ने चलो करें कुछ काम, देश का ऊंचा कर दें नाम, गढ़वाल से आए धर्मेंद्र सिंह नेगी ने कस मौज आ रै उत्तराखंड मां खेती चौपट कुडीबाडी खंडहर.. कविता प्रस्तुत की।
विवेक प्रजापति ने वीर रस की कविता सुनाई। इनके अलावा पदम सिंह पदम, सतीश शर्मा, मदन मस्ताना, जगदीश जोशी, शेष कुमार, कैलाश चंद्र यादव, नितिन कुमार ने काव्य पाठ किया।
आयोजक प्रधानाचार्य ओमशरण आर्य और प्रवक्ता जेसी आर्या ने कवियों को प्रतीक चिन्ह और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। संचालन नवीन सोराड़ी ने किया। इस मौके पर देवी दत्त शर्मा, उर्वा दत्त लखचौरा, खीम सिंह, प्रेम सिंह, नंदन मनराल, पूरन बंगारी, दीनदयाल लखचौरा, महेश रावत आदि मौजूद थे।