जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम ने न्यू इंडिया इंश्योरेंश कंपनी को वाहन क्षतिपूर्ति की 1.30 लाख रुपये की धनराशि एक माह के भीतर परिवादी को देने के आदेश दिए हैं। यदि निश्चित अविधि में धनराशि अदा नहीं की गई तो बीमा कंपनी को परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि तीन सितंबर 2014 से भुगतान की तिथि तक छह प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
पपरसैली अल्मोड़ा निवासी कमलेश चंद्र तिवारी ने नैनीताल मोटर्स प्रा. लि. रामपुर रोड हल्द्वानी से वाहन यूके-01-टीए-1697 खरीदा। कंपनी द्वारा वाहन का बीमा प्रबंधक न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लि. अल्मोड़ा से कराया। परिवादी ने बीमा प्रीमियम का 11478 रुपये का चेक बीमा कंपनी को दिया।
वाहन 23 फरवरी 2014 की रात दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जिसकी सूचना पुलिस और बीमा कंपनी को दी। बीमा कंपनी ने सर्वेयर भेजा निरीक्षण करवाया और सभी कागजात प्राप्त किए। परिवादी का वाहन मरम्मत में 1.30 लाख रुपये व्यय हुआ। परिवादी का कहना था कि एक फरवरी 2014 को हुए चेक बाउंस की सूचना कंपनी ने जानबूझकर उसे 23 फरवरी 2014 को दुर्घटना होने के बाद पांच मार्च 2014 को दी। यदि एक फरवरी 2014 को चेक बाउंस होने की सूचना उसे दे दी जाती तो वह प्रीमियम की धनराशि नगद जमा कर देता।
साक्ष्य पेश किए कि उसके खाते में एक फरवरी से 28 फरवरी तक 16 हजार रुपये जमा थे। फोरम ने माना कि बीमा कंपनी की सेवा में कमी साबित हुई है। फोरम के अध्यक्ष रवींद्र मैठाणी और सदस्य लीला जोशी ने आदेश सुनाया कि परिवादी क्षतिग्रस्त वाहन के मरम्मत में खर्च हुए 1.30 लाख रुपये पाने का अधिकारी है। फोरम ने बीमा कंपनी को एक माह के भीतर परिवादी को 1.30 लाख रुपये अदा करने के आदेश दिए।