युद्धाभ्यास के समापन पर मौजूद भारत-अमेरिका के सैनिक और अधिकारी।
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आतंकवाद और विद्रोह के खिलाफ भारत और अमेरिकी सेनाओं का संयुक्त युद्धाभ्यास यहां चौबटिया छावनी में संपन्न हो गया। समापन अवसर पर दोनों देशों के सैनिकों ने यहां गरुड़ा मैदान में भव्य परेड का आयोजन किया। दोनों देशों के कमांडिंग आफीसरों ने परेड का संयुक्त निरीक्षण किया। सैन्य अधिकारियों ने कहा कि युद्धाभ्यास के माध्यम से जहां दोनों देशों के संबंध प्रगाढ़ होंगे,
वहीं आतंकी गतिविधियों के खिलाफ मुहिम चलाने में सफलता मिलेगी।
इंडो-अमेरिकी सैनिकों का 12वां संयुक्त युद्धाभ्यास दो सप्ताह पहले 14 सितंबर को शुरू हुआ था। अमेरिकी सैन्य दल का प्रतिनिधित्व 5वीं इन्फेंट्री बटालियन, 20 इंफेंट्री रेजीमेंट, 2 स्ट्राइकर ब्रिगेड कांबेट टीम, 7 इंफेंट्री डिव और भारतीय दल का प्रतिनिधित्व कांगो ब्रिगेड कर रही थी। इस दौरान आतंकवाद और विद्रोह के खात्मे के लिए दोनों देशों के जवानों और अधिकारियों ने साझा रणनीति पर काम किया। जमीनी युद्ध की बारीकियां सीखीं।
अभ्यास के दौरान तकनीकी युद्ध कौशल पर विशेष ध्यान दिया गया। सेनाओं को संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के अभियानों के दौरान मिलने वाली दुश्मनों की धमकियों को विफल करने की योजना बताई गई। युद्ध कौशल के माध्यम से सैनिकों को सशक्त बनाने पर कार्य किया गया। समापन अवसर पर दोनों देशों के सैनिकों ने मार्चपास्ट, ध्वजारोहण के साथ अधिकारियों को सलामी दी। दोनों देशों के जवानों को संबोधित करते हुए मेजर जनल आरके रैना और मेजर जनरल थामस जेम्स ने कहा कि युद्धाभ्यास के तहत दोनों देशों की सेनाओं ने शारीरिक परीक्षण के साथ, फायरिंग, ड्रिल और तकनीकी कौशल के अनुभव साझा किए हैं। अकादमिक परिचर्चा में दोनों देशों के अनुभवी विशेषज्ञों ने तमाम युद्ध कौशल की बारीकियां बताई हैं। आतंकवाद और विद्रोह के खिलाफ यह अनुभव प्रभावी साबित होंगे। इस अवसर पर तमाम सीनियर और जूनियर अधिकारी मौजूद थे। समापन की पूर्व रात्रि पर चौबटिया में दोनों देशों की सेनाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी लुत्फ उठाया।