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भारतीय संस्कृति विश्व में अनूठी : प्रो. ओल्गा

Sun, 15 Feb 2015 11:20 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, अल्मोड़ा
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इंस्टीट्यूट आफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन मास्को की प्रो. ओल्गा कपिल ने कहा है कि भारतीय संस्कृति विश्व की अनूठी संस्कृति है। यहां देश के साथ पृथ्वी, नदियों, गाय को मां के रूप में पूजा जाता है। भारतीय समाज और संस्कृति में मां का विशेष महत्व है। प्रो. ओल्गा एसएसजे परिसर में इतिहास विभाग की ओर से शुरू हुई दो दिवसीय ‘मदर इन इंडियन कल्चर’ सेमिनार के उद्घाटन अवसर व्याख्यान दे रही थी।
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प्रो. ओल्गा ने कहा कि वह भारतीय संस्कृति से काफी प्रभावित हैं। वेद और पुराण का अध्ययन बताता है कि भारत जैसा दुनिया का कोई दूसरा देश नहीं है। गंगा, यमुना, सरस्वती नदियों को मां के रूप में पूजा जाता है। मां में शक्ति, भक्ति, ज्ञान और विवेक सभी हैं। मुख्य अतिथि देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति डा. चिन्मय पांड्या ने कहा कि भौतिकवादी युग में भारतीय जीवन मूल्यों का ह्रास चिंतनीय है।

 आज पाश्चात्य संस्कृति को बढ़ावा देकर मां के वास्तविक स्वरूप को भूला जा रहा है। मां की प्रतीक गंगा समेत अन्य नदियां प्रदूषित हो रही है। देश में नारी उत्पीड़न, भ्रष्टाचार की घटनाएं बढ़ रही हैं। इस ओर सोचने की जरूरत है। अध्यक्षता करते हुए कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी ने कहा कि मां के स्वरूप को जिंदा रखने के लिए भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाने की जरूरत है। जीबी पंत संस्थान के निदेशक डा. पीपी ध्यानी ने कहा कि मां के आदर्शों को अपनाकर देश को महान बनाएं। आईसीएसएसआर के निदेशक डा. जीएस सौन ने कहा कि आधुनिकता के दौर में पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव भारतीय संस्कृति पर भी पड़ रहा है, जो चिंताजनक है।
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एसएसजे परिसर निदेशक प्रो. आरएस पथनी, प्रो. आराधना शुक्ला, पालिकाध्यक्ष प्रकाश जोशी, प्रो. दया पंत ने भी विचार रखे। सेमिनार के संयोजक प्रो. सीएम अग्रवाल ने भारतीय संस्कृति में मां के विविध आयामों के बारे में बताया। आयोजक सचिव डा. संजय टम्टा ने सेमिनार की रूपरेखा प्रस्तुत की। संचालन डा. मेघा भारती ने किया। उद्घाटन अवसर पर छात्राओं ने सरस्वती वंदना और विवि कुल गीत गाया। वहां प्रो. जगत सिंह बिष्ट, प्रो. ओपीएस नेगी, प्रो. हामिद,  प्रो. एसएस बिष्ट, प्रो. एसडी शर्मा, प्रो. इला साह, डा. शैफाली अग्रवाल, प्रो. बीडीएस नेगी, डा. एचबी कोठारी, प्रो. केएन पांडे, डा. मधुलता नयाल, डा. संजीव आर्या, अशोक पांडे, ललित जोशी आदि मौजूद थे।
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