अल्मोड़ा। जिले में 25 आयुर्वेदिक अस्पताल किराये के भवन में संचालित हो रहे हैं। चमड़खान, तोली में विभाग के पास अस्पताल भवन निर्माण के लिए भूमि है लेकिन बजट नहीं मिलने से भवनों का निर्माण नहीं हो पा रहा है।
उत्तराखंड राज्य बनने के 19 साल बाद भी जिले में आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी। जिले में कुल 50 आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। वर्तमान में हालत यह है कि जिला मुख्यालय मेें भी आयुर्वेदिक अस्पताल के पास अपना भवन नहीं है। यहां आयुर्वेदिक अस्पताल लोअर माल रोड खोल्टा में किराये के भवन में संचालित हो रहा है। काकड़ीघाट, हवली, सैंणामानुर, मनुड़ी, बानठौक, तोली जिगोली, झुपुलचौरा, भगौती, मनान, नगचूलाखाल, बकस्वाड़, सोनी, दोड़म, बसई, अगासपुर, देवलीखेत, धारखोला, चमड़खान, स्यूनराकोट, तड़ागताल, सलपड़, डीनापानी, मेरगांव, जीनापानी आदि स्थानों पर आयुर्वेदिक अस्पताल किराये के भवनों में संचालित हो रहे हैं। बसंतपुर और टाना में अस्पताल लोगों द्वारा मुफ्त में दिए गए भवनों में संचालित किए जा रहे हैं। जिला आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा अधिकारी डॉ. केएस नपलच्याल ने बताया कि चमड़खान, तोली अस्पताल के भवन बनाने के लिए विभाग के पास भूमि है। शासन से बजट न मिलने के कारण भवनों का निर्माण नहीं हो पा रहा है।