तीन दिन की बारिश के बाद होली ने फिर रंग जमाया है। ढोल, दमाऊ, मजीरे की थाप पर होल्यारों के झुंड घर-घर जा रहे हैं लेकिन अनेक गांवों में गायन मोहल्ले में एक जगह बैठकर हो रहा है। बारिश के कारण होल्यारों का जोश घट गया था। होल्यारों ने अपने गीतों के गायन की शुुरुआत तुम जै काली कल्याण करो......अवध भयो अवतार हरि.......गाकर किया। होली के गीतों के गायन में महिलाएं, पुरुषों से पीछे नहीं हैं।
नगर के माल रोड, नुमाइशखेत, चौरासी आदि क्षेत्रों में होली के गीतों का गायन हो रहा है। होल्यारों ने आज बिरज में होली कै संग खेलूं......., सीता वन में अकेली कैसे रही....., मो चुड़िया दर काना बेदरद कन्हैया आदि गीतों का गायन किया। उधर कपकोट के होल्यार नगर पंचायत के वार्ड दो में जमा हुए। वहां से ढोल, नगाड़ा, झांझर की मनमोहक थाप पर चखतरी, भंडारीगांव, पुल बाजार होेकर सिलकानी पहुंचे। उन्होंने हरि जी ने चरितर पार कियो है पार न पायो कोई.....जल कैसे भरूं जमुना गहरी......यो ऋतु सावना आवना अब नहीं पिया का आवना, धनुषा बाण प्रभु ज्यू के हाथ लंका की तैयारी......अब रंग राजि रेक मंगल शीष हरे समेत अनेक मनभावन होली के गीतों का गायन किया।