उत्तराखंड परिवहन निगम की जिला मुख्यालय से पर्वतीय रूटों पर संचालित होने वाली कई बस सेवाएं लंबे समय से बंद पड़ी हैं। इनमें कई रूटों पर केमू की बसें भी नहीं चलतीं। जिससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोग जीप, टैक्सियों में महंगे किराए पर यात्रा करने को मजबूर हैं।
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी रोडवेज में बसों की कमी दूर नहीं हो सकी। जिला मुख्यालय स्थित रोडवेज डिपो के पास 38 बसों का ही बेड़ा है। पर्याप्त बसें न होने के कारण रानीखेत-नैनीताल, शीतलाखेत-नैनीताल, रानीखेत-अल्मोड़ा, अल्मोड़ा-रानीखेत, मासी-नैनीताल, मासी-अल्मोड़ा, देवाल- बरेली, बागेश्वर-बरेली-रानीखेत, अल्मोड़ा-पिथौरागढ़, पिथौरागढ़-गनाई रूटों पर कई सालों से बसों का संचालन ठप है। जिले के दूरस्थ कस्बों को भी बसें नहीं चल रही हैं। जिससे निगम को घाटा हो रहा है। सेमी डीलक्स बसें देहरादून रूट पर संचालित की जा रही हैं।
इधर, यात्रियों को मजबूरन अधिक किराए पर जीपों, टैक्सियों में यात्रा करनी पड़ रही है। कभी जीप, टैक्सी आदि भी न मिलने पर यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में टैक्सी चालक मनमाना किराया वसूलते हैं।
उत्तराखंड परिवहन निगम अल्मोड़ा डिपो के महाप्रबंधक क्रांति सिंह कहते हैं कि डिपो में बसों की कमी है। यहां सिर्फ 38 बसें हैं। यदि अल्मोड़ा डिपो को 25 और बसें मिल जाएं तो व्यवस्था सुधर सकती है। बसों की कमी से ही पर्वतीय रूटों पर संचालन बंद है।