अल्मोड़ा कोतवाली के आरक्षी कमल गोस्वामी।
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अल्मोड़ा। पुलिस के जवान खाकी पहनकर लोगों की सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं लेकिन अल्मोड़ा पुलिस का एक जवान इस फर्ज को निभाने के साथ कविताएं लिखकर लोगों को हिंदी भाषा के प्रति जागरूक भी कर रहा है। अल्मोड़ा कोतवाली में तैनात आरक्षी कमल गोस्वामी की अधिकतर कविताएं लोगों को हिंदी भाषा की उपयोगिता समझाती हैं। हिंदी के प्रति कमल में यह प्रेम अखबार पढ़कर आया।
2001 बैच के सिपाही कमल गोस्वामी अल्मोड़ा से पहले ऊधमसिंह नगर के विभिन्न थानों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। पुलिस विभाग में आने से पहले कमल ने बीमा सेक्टर में भी काम किया। कमल को अखबार पढ़ने का शौक भी रहा जिसके चलते उन्होंने आजीविका के लिए अखबार बांटे और अखबारों के करीब रहने से कमल को हिंदी से इतना लगाव हुआ कि वह हिंदी में कविताओं की रचना करने लगे।
उनकी अधिकांश कविताएं लोगों को हिंदी भाषा की उपयोगिता समझाती हैं। कोरोना काल में भी कमल ने कई हिंदी कविताओं की रचना की। उनकी कविता ‘मान है अभिमान है, हिंदी की एक अलग पहचान है...’ ‘कोविड में बंद बाजार और कर्फ्यू के भय में सारा संसार...’, ‘मैं बीता हुआ बचपन हूं, बचपन देखो कितना प्यारा...’ जैसी कविताएं अल्मोड़ा पुलिस के फेसबुक पेज पर काफी सराही गई हैं। कमल कहते हैं हिंदी के लिए अमर उजाला की पहल बेहद अनुकरणीय है।
ट्रैकिंग और बर्ड फोटोग्राफी से भी है प्यार
अल्मोड़ा। आरक्षी कमल गोस्वामी जहां डयूटी के बाद मिले समय में कविताओं की रचना करते हैं वहीं कमल को ट्रैकिंग और बर्ड फोटोग्राफी का भी शौक है। 2020 में कमल ने रानीखेत कोतवाली में तैनाती के दौरान बर्ड फोटोग्राफी की एक प्रदर्शनी भी लगाई थी जिसे लोगों ने काफी सराहा था। समय मिलने पर कमल साइक्लिंग और ट्रैकिंग में भी दिन बिताते हैं।