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हिंदी को बढ़ावा देने के लिए समर्पित भाव से काम कर रहे प्रो. बिष्ट

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प्रोफेसर शेर सिंह बिष्ट। - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा में हिंदी विभागाध्यक्ष और कुलानुशासक रहे प्रोफेसर शेर सिंह बिष्ट सेवानिवृत्ति के बाद भी जन-जन में हिंदी की अलख जगा रहे हैं। वह अपने परिचितों और आम जनता के बीच हिंदी में ही संवाद करते हैं। अध्यापन के दौरान भी उन्होंने छात्रों और शोधार्थियों के बीच हिंदी को ही बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी का महत्व आज काफी बढ़ गया है। विश्व फलक पर हिंदी अपनी चमक बिखेर रही है। इसका महत्व न कम हुआ और न ही होगा।
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प्रो. शेर सिंह बिष्ट ने वर्ष 1976 में कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर नैनीताल से हिंदी में एमए किया। विश्वविद्यालय में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने पर उन्हें स्वर्ण पदक मिला था। इसके बाद वह हिंदी की सेवा में जुट गए। 2015 में प्रो. बिष्ट ने भोपाल में हुए 10 वें विश्व हिंदी सम्मेलन में शिरकत की और विश्व में हिंदी की स्थिति पर प्रकाश डाला। सम्मेलन की स्मारिका में ‘हिंदी भाषा: संस्कृति और भारतीयता’ शीर्षक से वृहद आलेख छपा। उनका यह लेख और व्याख्यान तब काफी चर्चित रहा। 2015 में ही अल्मोड़ा में बीएसएनएल की ओर से आयोजित व्याख्यान माला में भी अतिथि के रूप में हिंदी की वैश्विक स्थिति पर व्याख्यान दिया। प्रो. बिष्ट की हिंदी में 30 पुस्तकें छप चुकी हैं। उनकी हिंदी, कुमाऊंनी, अंग्रेजी शब्दकोष चर्चित रहा है। इसका विमोचन 1994 में तत्कालीन राष्ट्रपति डा. शंकर दयाल शर्मा ने किया था। उन्होंने 10 पुस्तकों का संपादन किया। 200 आलेख, शोध पत्र राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में छप चुके हैं। प्रो. बिष्ट ने कहा कि भारत आज विश्व बाजार बन गया है। विश्व के कई देश अपना व्यापार बढ़ाने के लिए यहां हिंदी सीख रहे हैं। साथ ही अपने यहां भी हिंदी सिखा रहे हैं। ऐसे में हिंदी का भविष्य उज्ज्वल है।
हिंदी की सेवा के लिए प्रो. बिष्ट को मिले हैं कई पुरस्कार
अल्मोड़ा। हिंदी की सेवा के लिए प्रो. शेर सिंह बिष्ट को 1993 में यूजीसी कॅरिअर अवार्ड, वर्ष 2003 में राष्ट्रीय हिंदी अकादमी कोलकाता की ओर से आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय साहित्य सम्मान और इसी साल उत्तरांचल रत्न अवार्ड मिला। उत्तराखंड भाषा संस्थान देहरादून की ओर से वर्ष 2011 में डॉ. गोविंद चातक सम्मान, केंद्रीय हिंदी निदेशालय की ओर से वर्ष 2015 में राष्ट्रीय शिक्षा पुरस्कार, वर्ष 2016 में लाइव टाइम अचीवमेंट अवार्ड, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ से सुमित्रानंदन पंत नामित पुरस्कार, वर्ष 2009 में महाकवि हरिशंकर आदेश साहित्य चूड़ामणि सम्मान समेत कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
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प्रो. बिष्ट के निर्देशन में 16 विद्यार्थी कर चुके हैं पीएचडी
अल्मोड़ा। प्रो. शेर सिंह बिष्ट के निर्देशन में 16 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि मिल चुकी है। वर्तमान में उनके निर्देशन में चार शोधार्थी शोध कर रहे हैं। उनके निर्देशन में ही 18 लघु शोध लिखे गए हैं। प्रो. बिष्ट के साहित्य पर ममता गहतोड़ी ने शोध कर पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर ली है। आठ विद्यार्थी उनके साहित्य पर लघु शोध लिख चुके हैं।
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