अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) की ओर से कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर में राष्ट्रीय महिला किसान दिवस पर नारी शक्ति से कृषि समृद्धि विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया।मुख्य अतिथि पूर्व खरही मंडल अध्यक्ष हेमा देवी ने कहा कि महिलाएं कृषि क्षेत्र की रीढ़ हैं और उनके परिश्रम, अनुभव एवं नवाचार से खेती को अधिक लाभकारी एवं समृद्ध बनाया जा सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. राज कुमार ने कहा कि कृषि क्षेत्र से लेकर वर्तमान समय की विभिन्न गतिविधियों में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक उन्नत एवं लाभकारी बनाने के लिए प्रेरित किया। बागेश्वर के मुख्य कृषि अधिकारी के प्रतिनिधि विकास बिष्ट ने महिला सशक्तिकरण के लिए संचालित विभागीय विभिन्न योजनाओं को विस्तार से साझा किया। विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. कमल कुमार पांडे ने महिला किसानों को कृषि एवं बागवानी से संबंधित विभिन्न तकनीकी जानकारियां प्रदान कीं।
फसलों में लगने वाले प्रमुख कीटों एवं रोगों की पहचान, उनकी रोकथाम तथा प्रभावी प्रबंधन के विषय में जानकारी दी। डॉ. एनके सिंह ने पशुओं में होने वाली प्रमुख बीमारियों, उनके लक्षणों, बचाव के उपायों तथा कृमिनाशक दवाओं के उचित उपयोग के बारे में महिला किसानों को जागरूक किया। संचालन संस्कृति सिंह ने किया।
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सम्मानित हुईं प्रगतिशील महिला किसान
कार्यक्रम में अपने-अपने क्षेत्रों में कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला किसानों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाली महिला किसानों में चंपा देवी, कमला देवी, तथा कमला देवी निवासी ग्राम लुरीगांव-छौना सहित अन्य महिला किसान शामिल रहीं। साथ ही महिलाओं ने प्रश्नोतरी प्रतियोगिता कार्यक्रम में भाग लेकर पुरस्कार प्राप्त किए। सम्मान समारोह के माध्यम से महिला किसानों के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में भी नवीन कृषि तकनीकों को अपनाने एवं अन्य किसानों को प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
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बेमौसमी सब्जी और जीवामृत बनाने की तकनीक सीखी
कार्यक्रम के अंतर्गत महिला किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र के प्रक्षेत्र का भ्रमण भी कराया गया। भ्रमण के दौरान उन्हें पॉलीहाउस में बेमौसमी सब्जियों के उत्पादन, संरक्षित खेती की तकनीकों मुर्गी पालन ईकाई तथा प्राकृतिक खेती इकाई में जीवामृत तैयार करने की विधि एवं उसके उपयोग की जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने महिला किसानों को इन तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने, खेती की लागत कम करने तथा कृषि को अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने के लिए प्रेरित किया।