सोलहवीं सदी में बने ऐतिहासिक अल्मोड़ा कलक्ट्रेट के भवन को हेरिटेज घोषित करने की योजना शासन स्तर पर लटकी है। इस योजना के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) को बजट देना है, लेकिन शासन स्तर से मंजूरी न मिलने से कलक्ट्रेट भवन को हेरिटेज बनाने का मामला ठंडे बस्ते में चला गया है।
चंद शासकों ने ऐतिहासिक मल्ला महल (कलक्ट्रेट भवन) का निर्माण 16वीं शताब्दी में करवाया। करीब 425 साल पुराने ऐतिहासिक कलक्ट्रेट भवन से तत्कालीन चंद शासक पूरे कुमाऊं मंडल का साम्राज्य चलाते थे। बाद में ब्रिटिश अफसरों ने भी मल्ला महल से कुमाऊं का प्रशासन चलाया।
चंद शासकों द्वारा बनाया गया मल्ला महल ऐतिहासिक, प्राचीन शिल्प, स्थापत्य कला की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। देश को आजादी मिलने के बाद इसी भवन में कलक्ट्रेट कार्यालय संचालित हो रहा है। कलक्ट्रेट भवन में डीएम, एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार कार्यालय, कोषागार, रजिस्ट्रार कार्यालय, आपदा प्रबंधन, आबकारी आदि विभागों के कार्यालय हैं।
लंबे समय से ऐतिहासिक, प्राचीन मल्ला महल को हेरिटेज घोषित करने की मांग उठ रही है। पांडेखोला में जजी परिसर के पास की भूमि में कलक्ट्रेट बनाना प्रस्तावित है। पूर्व में प्रशासन ने मल्ला महल को हेरिटेज घोषित करने को शासन को प्रस्ताव भेजा था। इसके बाद एडीबी के अधिकारियों ने पिछले वर्ष कलक्ट्रेट भवन का सर्वे भी किया था, लेकिन इसके बाद से मामले ठंडे बस्ते में है।