बागेश्वर। राजनीति में अपना भविष्य तलाश रहीं हेमलता को पहले ही सीढ़ी पर एक साथ जीत और हार का स्वाद चखना पड़ा है। उनके एक निर्णय ने उनके राजनीतिक कॅरिअर को भी दांव पर लगा दिया। भाजपा में शामिल होने के महज डेढ़ महीने के बाद अनुशासनहीनता के चलते जिस तरह से उन्हें पार्टी से बाहर किया गया है, उनकी आगे की राजनीति निश्चित रूप से इससे प्रभावित होते दिख रही है।
पंचायत चुनाव का बिगुल बजने के बाद से जिले में चर्चित नाम हेमलता था। पारिवारिक पृष्ठभूमि से बीजेपी विरोधी दलों में शामिल हेमलता ने पंचायत चुनाव में भैरूचौबट्टा जिपं सीट से चुनाव लड़ने का फैसला लिया।
हेमलता का शिक्षित होना और प्रचार के दौरान अलग-अलग तरीके से समाज में पेश आने से लोगों में वह काफी चर्चित रही। इसे देखते हुए भाजपा ने क्षेत्रीय सलाहकारों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की सलाह के बाद 25 जून को हेमलता को पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई।
नामांकन के दिन नगर पालिका और ग्राम पंचायत दो जगह नाम को लेकर एक बार हेमलता ने सुर्खियां बटोरी। नामांकन के बाद भाजपा के सभी पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं ने हेमलता के प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी। पार्टी के विधायक, पूर्व कैबिनेट मंत्री और दायित्वधारी ने उनके समर्थन में गांव-गांव जाकर बोट मांगे। चुनाव परिणाम में हेमलता अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस की पूजा आर्या से 500 से अधिक वोटों के अंतर से जीतीं। जिपं अध्यक्ष के आरक्षण की सूची जारी होने के बाद सीट एससी महिला के लिए आरक्षित हो गई। इसके बाद पार्टी की ओर से उनको अध्यक्ष प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चाएं तेज हो गईं लेकिन पार्टी ने वज्यूला सीट से जीती शोभा आर्या को प्रत्याशी बनाया। पार्टी की प्रत्याशी घोषित होने के बाद हेमलता भाजपा के संपर्क से गायब हो गई। उनके गायब होने के बाद पूरे जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।
बृहस्पतिवार को मतदान के लिए हेमलता की कांग्रेस समर्थित सदस्यों के साथ मतदान के लिए जाने के बाद स्थिति साफ हो गई। पार्टी ने जीत के जश्न से फुर्सत पाते ही हेमलता और उनके पति अर्जुन देव को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया।
पार्टी से निष्कासित होने के बाद जिपं सीट में उनके कदम से आहत कार्यकर्ताओं ने उसका पुतला दहन कर विरोध दर्ज किया। अब सवाल यह है कि हेमलता ने यह कदम उठाकर कौन सी रणनीति तैयार की और कौन इसका जिम्मेदार है।