अल्मोड़ा। सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में मातृ-शिशु मृत्यु दर कम किए जाने समेत गर्भवतियों और नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के मकसद से स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित ‘खुशियों की सवारी’ योजना जच्चा-बच्चा के लिए संजीवनी बनकर सामने आई है।
बीते एक वर्ष में इस योजना के तहत करीब 2,231 से अधिक जच्चा-बच्चा को अस्पताल से निशुल्क उनके घर पहुंचाया गया है। इस योजना से पहाड़ी इलाकों के दूरस्थ क्षेत्रों की गर्भवतियों को अल्ट्रासाउंड जांच आदि के लिए अस्पताल पहुंचने की भी बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।
जिले में स्वास्थ्य सुविधा बेहतर किए जाने के उद्देश्य से मातृ-शिशुओं के लिए खुशियों की सवारी योजना की शुरुआत वर्ष 2011 में की गई थी।
इसके तहत सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को सुरक्षित घर पहुंचाया जाता है। हालांकि जागरूकता की कमी के चलते कई लोगों को इसकी केवल एक ही सेवा की ही जानकारी है और अन्य सुविधाओं से लोग अंजान हैं।
योजना में प्रसूति को कई तरह की जांच और अल्ट्रासाउंड के लिए घर से अस्पताल लाने और वापस छोड़ने की भी सुविधा दी जाती है।
एक वर्ष तक के बीमार शिशुओं को भी अस्पताल लाने और घर छोड़ने की सुविधा निशुल्क दी जा रही है।