अल्मोड़ा। सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान मेडिकल कॉलेज में ह्रदय और सिर की गंभीर चोटों से संबंधित इलाज के लिए सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का अभाव है। इस कारण मरीजों को हल्द्वानी, बरेली, दिल्ली आदि महानगरों की दौड़ लगानी पड़ रही है।
जिले में बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के दावे कर करोड़ों रुपये खर्च कर मेडिकल कॉलेज खोला गया है। इससे अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ सहित गढ़वाल सहित अन्य क्षेत्रों के लोगों को बेहतर इलाज की उम्मीद जगी थी लेकिन यहां किडनी, हृदय, रीढ़ की हड्डी, तंत्रिका तंत्र आदि से संबंधित बीमारियों से पीड़ित मरीजों को सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों के अभाव से महानगरों का रुख करना पड़ रहा है। यहां अभी तक यूरोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट और न्यूरो सर्जन सहित डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी है।
सीटी स्कैन मशीन है, पर विशेषज्ञ की कमी
कॉलेज में करोड़ों की लागत से हाईटेक सीटी स्कैन मशीन तो स्थापित कर दी गई है और टेक्नीशियन की तैनाती भी हो चुकी है लेकिन जांच रिपोर्ट को देखने के लिए सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो सके हैं।
इलाज के अभाव में गईं 100 से अधिक जानें
स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में हृदय और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी आपात स्थितियों में समुचित इलाज न मिलने के कारण करीब 100 से अधिक मरीजों की जान गई है। वर्ष 2025 में करीब 45 से अधिक मरीज हृदयाघात और सिर की गंभीर चोटों के साथ अस्पताल पहुंचे जिन्हें उचित इलाज न मिलने के कारण अन्य शहरों में भेजना पड़ा।
मेडिकल कॉलेज में यूरोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट और न्यूरो सर्जन के सुपर स्पेशलिस्टों के पद स्वीकृत नहीं हैं। पद स्वीकृत होने के बाद ही तैनाती संभव है। -डॉ. सीपी भैंसोड़ा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा।