रानीखेत (अल्मोड़ा)। आजादी के बाद कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन रानीखेत सब डिवीजन में हजारों युवाओं को आज तक खेल स्टेडियम नसीब नहीं हो सका है। परिणामस्वरूप युवा आज भी खेतों और गली-कूचों में खेलकर भविष्य की संभावनाओं को तलाश रहे हैं। वर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रानीखेत में खेल स्टेडियम की घोषणा तो की, लेकिन मामला वन विभाग और शासन के बीच उलझकर रह गया। हर विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी भी इस मुद्दे को जमकर उछालते रहे हैं, लेकिन चुनाव के बाद मुद्दा गौण हो जाता है।
रानीखेत नगर में ही डेढ़ दर्जन शिक्षण संस्थाओं में लगभग 14 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इसके अलावा द्वाराहाट, भिकियासैंण, चौखुटिया, सल्ट, स्याल्दे और ताड़ीखेत विकासखंड की संस्थाओं में पढ़ने वाले नौनिहालों की संख्या 38 हजार से अधिक है। बेहतर स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के लिए खेल सुविधाओं को पहली जरूरत माना जाता है, लेकिन उपमंडल में कहीं भी स्टेडियम नहीं है।
रानीखेत नगर में सेना के रहमोकरम पर खेल गतिविधियां निर्भर हैं। तमाम कोशिशों के बावजूद छावनी और छावनी से बाहर कहीं भी भूमि का इंतजाम नहीं हो सका। दो साल पहले वर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कैबिनेट की बैठक में खेल स्टेडियम की घोषणा की, इसके लिए राय स्टेट के पास भूमि देखी गई, लेकिन वन विभाग के अनुसार वहां पेड़ों की संख्या 15 सौ से अधिक है। पेड़ों के पातन की समस्या आड़े आ गई। उपमंडल क्षेत्र में खेल स्टेडियम बनेंगे या नहीं यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन राजनीतिक दलों ने चुनाव का शंखनाद होने के साथ ही इस मुद्दे पर युवाओं को लुभाने का प्रयास जरूर शुरू कर दिया है।