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महत्वाकांक्षी हरेला उगाओ पुरस्कार योजना अधर में

Fri, 08 Jul 2016 09:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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 प्रदेश सरकार द्वारा पिछले साल हरेला पर्व पर शुरू की गई हरेला उगाओ, पुरस्कार पाओ योजना बजट के अभाव में टायं-टायं फिस्स हो गई है। इस योजना के तहत हर ग्राम पंचायत में सर्वश्रेष्ठ हरेला उगाने वाली महिलाओं को साल भर तक पुरस्कार स्वरूप 500 रुपये हर माह देने की घोषणा की गई थी, लेकिन पूरा साल बीत गया है पर चुनी गई महिलाओं को  सिर्फ दो माह के पुरस्कार की राशि मिली है।
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इस पुरस्कार के लिए अल्मोड़ा जिले में ही हर माह 5.80 लाख रुपये के बजट की जरूरत है। और बचे हुए 10 माह के पुरस्कार की राशि के लिए 5.80 करोड़ रुपये का बजट चाहिए। कमोवेश यही स्थिति अन्य जिलों की भी है। इस हालत में इस पुरस्कार योजना के आगे चलने की संभावना कम ही नजर आ रही है। 
पिछले साल हरेला पर्व के मौके पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हरियाली योजना के अंतर्गत हरेला उगाओ पुरस्कार पाओ योजना शुरू की थी। हरेले को पौधरोपण से जोड़ते हुए इस योजना के तहत जुलाई में होने वाले हरेला पर्व के दिन ग्राम पंचायत स्तर पर हरेला प्रतियोगिता करवाई गई और गांव में सर्वश्रेष्ठ हरेला उगाने वाली महिला को पुरस्कार स्वरूप साल भर तक प्रति माह 500 रुपये देने की घोषणा की थी। अल्मोड़ा जिले के 11 विकासखंडों में कुल 1162 ग्राम पंचायतें हैं। इस हिसाब से इस योजना के तहत पुरस्कार के लिए चुनी गई महिलाओं को 500 रुपये भुगतान के लिए हर माह करीब 5.80 लाख रुपये का बजट चाहिए। 
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जानकारी मिली है कि सीएम की इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए बीते साल जुलाई-अगस्त का ही बजट उपलब्ध हो पाया। उसके बाद शासन से कोई धनराशि मंजूर नहीं हुई। जिससे चुनी गई महिलाओं को करीब 10 माह की पुरस्कार राशि का भुगतान नहीं हो सका है। अब अकेले अल्मोड़ा जिले की 1162 ग्राम पंचायतों में चयनित महिलाओं के 10 माह के पुरस्कार की राशि के भुगतान के लिए ही लगभग 5.80 करोड़ रुपये के बजट की जरूरत है। पता चला है कि राज्य के अन्य जिलों में भी इसके लिए धनराशि नहीं मिली है। अब सभी जिलों में एकमुश्त भुगतान के लिए भारी बजट की आवश्यक्ता होगी। इधर जिला विकास अधिकारी मो. असलम ने बताया कि इस योजना में महिलाओं को पुरस्कार देने के लिए बीते साल दो माह का बजट मिला था। दो माह के पुरस्कार की राशि सभी ब्लाकों में बंटवा दी गई थी उसके बाद से बजट उपलब्ध नहीं हो सका है। 
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