जिले में प्रसिद्ध हरेला पर्व धूमधाम से मनाया गया। बच्चों और अन्य लोगों ने परिवार में बुजुर्गों से हरेला शिरोधारण कर आशीर्वाद लिया। बुजुर्गों ने हरेला शिरोधारण करते समय 'लाग हरियाल, लाग बग्वाल जी रयै जागि रयै, यो दिन बार भेटने रया.... कहकर आशीर्वाद दिया।
हरेले को शिरोधारण करने से पूर्व मंदिरों में चढ़ाया गया। मान्यता है कि हरेला जितना अच्छा उगेगा फसल भी उतनी ही अच्छी होगी। परंपरा के तहत ग्रामीण इलाकों में नव विवाहिताओं ने अपना पहला हरेला त्यौहार मायके में मनाया। हरेले पर्व पर कई स्थानों पर पौधे भी लगाए गए। मान्यता है कि हरेले के दिन लगाए गए पौधे जल्दी उग जाते हैं। इस दिन ग्रामीण इलाकों में काफी संख्या में पौधे भी लगाए गए।