‘बरस दीवाली बरसे फाग जो भागि जीवे अगले साल...’ के आशीर्वचन के साथ जिले में रंगों का पर्व होली उल्लासपूर्वक मनाया गया। छलड़ी के मौके पर लोगों ने एक-दूसरे को अबीर गुलाल लगाया और रंगों की बौछार की। होल्यारों ने गीतों की शुरूआत ‘रंग बरसे भीगे चुनर वाली रंग बरसे...’ गाकर की। होल्यार मस्ती भरे गीतों के साथ कुमाऊंनी और हिंदी फिल्म के मनभावन गीतों पर झूम रहे थे। महिलाएं भी होली के गीतों पर जमकर थिरकीं।
बृहस्पतिवार की रात चीर दहन के बाद दूसरी सुबह लोग ढोलक, ढोल नगाड़ाें, मजीरे और झांझर की थाप पर होली गायन के लिए घर-घर निकले। लोगाें ने एक-दूसरे को अबीर गुलाल लगाया और रंगों की बरसात की। होलयारों ने भर पिचकारी सन्मुख मारी..., जोगी आयो शहर में व्यापारी..., तन मारो मन मारो दिल रेगो सैय्यां..., जल कैसे भरूं जमुना गहरी... समेत अनके मनभावन गीत गाए।
इनके अलावा हैरे ज्वान मेरि नौलि परांणा, बेड़ू पाको बारोमासा..., घुघुति न बासा, रानीखेता राम ढोला त बजांल.... समेत कुमाऊंनी के मनमोहक गीतों का गायन किया। होल्यारों को गुजियां और मिठाइयां खिलाईं।