रानीखेत (अल्मोड़ा)। विश्वविख्यात हैड़ाखान मंदिर में अश्विन नवरात्र में पिछले 45 वर्षों से अनवरत चल रहा जगदंबा महायज्ञ कोरोना महामारी के कारण सूक्ष्म रूप से मनाया जाएगा। चार दशकों में पहली बार यहां देशी, विदेशी भक्तगणों का तांता नहीं लग पाएगा। आश्रम परिसर के ही कुछ लोग यज्ञ में शिरकत करेंगे।
बाबा हैड़ाखान मंदिर में देशी, विदेशी भक्तों की अगाध श्रद्धा है। अश्विन नवरात्रों में यहां हर साल नौ दिनी विश्व शांति के लिए जगदंबा महायज्ञ होता है। इसमें सैकड़ों की संख्या में भक्तजन भाग लेते हैं। बाबा के विदेशी भक्तगण हिंदू रीति के अनुसार यहां विवाह करते हैं। नौ दिनों तक पूरे आश्रम में भजन, कीर्तनों की धूम मची रहती थी। लेकिन कोरोना के कारण इस बार हैड़ाखान मंदिर परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ है। यहां वर्तमान में केवल सात विदेशी भक्त हैं, जो यहीं रहते हैं। इस बार देशी विदेशी भक्तगणों को आमंत्रित भी नहीं किया गया है। यज्ञशाला में जहां पहले तीन से साढ़े तीन सौ देशी, विदेशी भक्तगण आहुति देते थे, वहीं अब मात्र स्थानीय आचार्य सहित 10 से 12 लोग आहुतियां डालेंगे। भंडारे का आयोजन भी नहीं किया जाएगा। आश्रम के प्रशासक कर्नल (रिटायर्ड) बीएस राणा ने बताया कि कोविड नियमों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। फिल्म अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा, पूर्व सांसद रमा पायलट आदि भी नहीं पहुंच पाएंगी। हैड़ाखंडी समाज के चेयरमैन पूर्व ब्रिगेडियर डॉ. अरविंद लाल ने इस बार श्रद्धालुओं से अपने घर से ही बाबा को याद करने की अपील की है।
सुरक्षित दूरी से होंगे कीर्तन और आरती
रानीखेत। हैड़ाखान मंदिर में नौ दिनी जगदंबा महायज्ञ के तहत होने वाले भजन कीर्तन भी सूक्ष्म रहेंगे। यहां 10 लोगों की बैठने की व्यवस्था की गई है। इसमें भी सुरक्षित दूरी के लिए निशान भी लगाए गए हैं। सायंकालीन आरती में भी बाहरी लोगों को शामिल होने की अनुमति नहीं है।
-इन देशों के भक्त पहुंचते थे हर साल यज्ञ में
-हॉलैंड, रूस, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, इटली, जर्मनी, यूएसए, कनाडा, म्यांमार, श्रीलंका, चीन, स्वीडन, फ्रांस।