रानीखेत (अल्मोड़ा)। बद्री व्यू क्षेत्र के जंगलों में फिर समृद्ध जैव विविधता की झलक देखने को मिली है। पक्षी विशेषज्ञ व बर्ड फोटोग्राफर लोचन बिष्ट ने ग्रेटर येलोनैप वुडपेकर की तस्वीर अपने कैमरे में कैद की है। इस पक्षी की मौजूदगी को वन क्षेत्र की बेहतर पारिस्थितिकी और प्राकृतिक आवास की समृद्धि का संकेत माना जा रहा है।
पक्षी विशेषज्ञ लोचन बिष्ट ने बताया कि ग्रेटर येलोनैप वुडपेकर मुख्य रूप से चौड़ी पत्ती वाले घने जंगलों में पाया जाता है। यह पेड़ों की छाल में छिपे कीटों और उनके लार्वा को निकालकर भोजन करता है जिससे जंगलों में कीटों का प्राकृतिक नियंत्रण भी बना रहता है। उन्होंने कहा कि बद्री व्यू और आसपास के वन क्षेत्र में समय-समय पर ऐसे पक्षियों का दिखाई देना इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यदि जंगलों और पुराने वृक्षों का संरक्षण किया जाए तो भविष्य में भी ऐसी प्रजातियां यहां सुरक्षित रह सकेंगी। ग्रेटर येलोनैप वुडपेकर भारत में पाए जाने वाले बड़े कठफोड़वों में शामिल है। संवाद
नर और मादा में क्या है अंतर
ग्रेटर येलोनैप वुडपेकर में नर और मादा को सिर के रंग से पहचाना जा सकता है। नर के सिर के ऊपरी भाग पर चमकीला पीला रंग होता है जो इसे अधिक आकर्षक बनाता है। मादा के सिर पर पीला रंग नहीं होता। इसका गला भूरा दिखाई देता है।
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कितना होता है आकार
यह भारत में पाए जाने वाले बड़े कठफोड़वों में से एक है। इसकी लंबाई सामान्यतः 33 से 36 सेंटीमीटर तक होती है। मजबूत चोंच और शक्तिशाली गर्दन की मांसपेशियां इसे पेड़ों की कठोर छाल पर आसानी से प्रहार करने में सक्षम बनाती हैं। ऐसे में इस जैव विविधता के संरक्षण के लिए जंगलों और पुराने वृक्षों को सुरक्षित रखना बेहद आवश्यक है।
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कोट -
ऐसे पक्षियों का होना वन क्षेत्र के स्वस्थ और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का सकारात्मक संकेत है। विभाग वन्यजीवों और पक्षियों के प्राकृतिक आवास के संरक्षण के लिए लगातार कार्य कर रहा है। लोगों से भी अपील है कि वे जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण में सहयोग करें ताकि आने वाली पीढ़ियां भी ऐसी प्रजातियों को प्राकृतिक वातावरण में देख सकें। - तापस मिश्रा, वन क्षेत्राधिकारी रानीखेत