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कला, संस्कृति को बढ़ावा देने को काम करें सरकारें : मठपाल

Sun, 19 Nov 2017 10:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
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एसएसजे परिसर अल्मोड़ा में हुई संगोष्ठी में पुस्तक का विमोचन करते मुख्य अतिथि पद्मश्री यशोधर मठपाल तथा अन्य। - फोटो : अमर उजाला
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कुमाऊं विश्वविद्यालय के एसएसजे परिसर के दृश्यकला संकाय में हिस्टोरिकल फाइन आर्ट्स एंड एशियाई कल्चर’ विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी शुरू हो गई है। मुख्य अतिथि पद्मश्री डा. यशोधर मठपाल ने कहा कि उत्तराखंड की लोक कला और संस्कृति का गौरवशाली अतीत रहा है। जिसने विश्व पटल पर अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने कहा कि भारतीय लोक कला संस्कृति ने एशिया में अपना विशिष्ट स्थान बनाया है। उत्तराखंड की कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सरकारों को विशेष पहल करनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि लोक कला और संस्कृति का क्षेत्र बहुत व्यापक है। इन क्षेत्रों में आज गहन शोध करने की जरूरत है। उन्होंने स्लाइड शो के माध्यम से रामायण, कला संस्कृति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर डा. यशोधर मठपाल के अलावा अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से संगोष्ठी के सह संयोजक डा. संजीव आर्य की पुस्तक ‘राजस्थानी चित्रकला में कला तत्व एक संक्षिप्त अध्ययन’ के अलावा 175 शोध पत्रों के सारांशों की सोविनियर का विमोचन किया।

इससे पूर्व मुख्य अतिथि मठपाल, विशिष्ट अतिथि डा. प्रवीण सिंह बिष्ट और संगोष्ठी के संयोजक प्रो. शेखर चंद्र जोशी ने संयुक्त रूप से संगोष्ठी का शुभारंभ किया। संगोष्ठी के दौरान राजस्थान के राजेश गोयल, अलीगढ़ के गोविंद प्रसाद, डा. अरविंद, मो. आजाद अंसारी, दिल्ली के कोमल पांडे, डा. ललित, विरेन चोपड़ा, आंध्र प्रदेश विश्वविद्यालय के पवन कुमार, रुड़की की डा. अर्चना चौहान, बिजनौर की डा. अर्पणा चौहान ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इस मौके पर नीरज भट्ट, संतोष सिंह मेर, पूरन मेहता, नेहा खोलिया, लक्ष्मी, पूजा, दीपिका, दीपक चंद्र, दीपक साह, कुमकुम पांडे, तनीषा ने अपने शोध प्रस्तुत किए।
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