जन स्वास्थ्य संघर्ष मोर्चा के तहत विभिन्न राजनैतिक और सामाजिक संगठन के प्रतिनिधियों की लाला बाजार और मिलन चौक पर हुई नुक्कड़ सभा में वक्ताओं ने स्वास्थ्य सुविधाओं को निजी हाथों में देने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकारें पूंजीपतियों के एजेंट की तरह काम कर रही हैं।
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को निजी हाथों में सौंपने के लिए प्रदेश सरकार ने विश्व बैंक से 800 करोड़ रुपए लिए हैं। इससे एक तरफ राज्य में अतिरिक्त कर्ज का बोझ बढ़ेगा तो वहीं स्वास्थ्य सुविधा के निजीकरण से आम-आदमी को बेहतर चिकित्सा सुविधा का लाभ नहीं मिल सकेगा। उत्तराखंड लोक वाहिनी के सचिव पूरन चंद्र तिवारी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा में मुनाफाखोरी के चलते सरकार सरकारी अस्पतालों को निजी हाथों में सौंपने जा रही है। डीवाईएफआई के राज्य अध्यक्ष यूसुफ तिवारी ने कहा कि पीपीपी मोड का पूरे प्रदेश में विरोध किया जाएगा।
सीपीआईएम के राज्य सचिव दिनेश पांडे ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं और शिक्षा का प्रबंध करना सरकारों का उत्तरदायित्व है लेकिन सरकारें अपनी जिम्मेदारियों को नहीं निभा रही हैं। जनवादी महिला समिति की सुनीता पांडे ने कहा कि पीपीपी मोड का विरोध किया जाएगा। अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ समाजवादी नेता मदन लाल साह ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सरकारों का संवैधानिक उत्तरदायित्व है। आरडीएफ के प्रदेश अध्यक्ष जीवन चंद्र ने कहा कि जब तक सरकार प्रदेश के अस्पतालों को पीपीपी मोड में देने के फैसले को रद्द नहीं करती आंदोलन जारी रहेगा। संचालन यूसुफ तिवारी ने किया। सभा में दयाकृष्ण कांडपाल, जीवन चंद्र, दिवान सिंह बिष्ट, कौशल पंत, मदन लाल साह, रेखा धस्माना, प्रेम आर्या, आनंदी मनराल, वसीम अहमद, अजय तिवारी, ललित मोहन बिष्ट, देवेंद्र कुमार, जनवादी महिला समिति की सुनीता पांडे, चंद्रा राणा आदि मौजूद थे।