नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने कहा है कि उत्तराखंड में हुए आपदा घोटाले से देश ही नहीं विश्व स्तर पर राज्य की छवि धूमिल हुई है। यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इतने गंभीर मामले की जांच मुख्य सचिव से करवाकर लीपापोती करना चाहती है। प्रदेश के अधिकारी चाहे कितने ईमानदार हों उन्हें सरकार के दबाव में ही काम करना होगा। ऐसे में निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। सरकार अगर पाक-साफ है तो उसे इस मामले की जांच सीबीआई से करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार उल्टा सूचना आयुक्त के खिलाफ विद्वेष की भावना से तरह-तरह के आदेश पारित कर रही है।
पत्रकार वार्ता में भट्ट ने कहा कि आपदा के दौरान किए गए स्टिंग ऑपरेशन की सीडी विधानसभा अध्यक्ष को सौंपी गई थी जिसमें आपदा किट घोटाले के साथ ही अपात्र लोगों को धन देने और फर्जी सोसाइटी को करोड़ों रुपए का भुगतान किया गया था। उन्होंने एक सोसाइटी के जरिए सहायता के नाम पर अपने चहेतों को करोड़ों रुपए बांटने का भी आरोप लगाया। भट्ट ने कहा कि आपदा में एक तिमंजिले मकान का टिन शेड क्षतिग्रस्त हो गया था सरकार ने उस व्यक्ति को 40 लाख रुपए का भुगतान कर दिया। मुख्यमंत्री ने इन सभी मामलों की जांच करने की बात कही थी लेकिन एक अधिकारी से जांच करवाकर क्लीन चिट दे दी गई। अब आरटीआई के जरिये सरकार के कारनामों की असलियत सामने आ गई है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार ने नियमों को ताक में रखकर एक करोड़ रुपए तक के कार्य भी टेंडर के बिना करवाकर धन का भारी दुरुपयोग किया और अधिकांश जगह इस धनराशि का कांग्रेस कार्यकर्ताओं को ठेके देने में दुरुपयोग हुआ। 7600 करोड़ रुपए के इन कार्यों को भी सीबीआई जांच में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब सरकार सूचना आयुक्त के खिलाफ भी बदले की भावना दिखा रही है। जबकि इससे पहले भाजपा शासन के दौरान कुंभ और एनआरएचएम के कार्यों को लेकर सूचना आयुक्त के आदेशों पर कांग्रेस सरकार ने तुरंत जांच कराने के आदेश दिए थे। हालत यह है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ ऊल-जुलूल बयान दे रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर 10 जून को भाजयुमो के नेतृत्व में सीएम आवास का घिराव किया जाएगा। इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन राम आर्या, भाजपा नगर अध्यक्ष धर्मेंद्र बिष्ट, अजीत कार्की, राजीव गुरुरानी, सीएल टम्टा आदि मौजूद थे।