मुख्यमंत्री के औद्योगिक सलाहकार रणजीत सिंह रावत ने कहा है कि सरकार संस्कृति के संरक्षण के साथ ही उसे लोगों की आजीविका का जरिया बनाने को प्रयासरत है।
इसके लिए सीएम ने हरेला पर्व पर गांव-गांव में फल और चारा पत्ती प्रजाति के पौधे लगाने के साथ ही महिलाओं में नेतृत्व विकास की भावना विकसित करने को हरेला प्रतियोगिता कराने का निर्णय लिया है।
यहां पत्रकारों से वार्ता करते हुए श्री रावत ने कहा कि फल और चारा पत्ती के पेड़ों की तादात बढ़ने से पशु पालन और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि हरेला पर्व के दिन सभी ग्राम पंचायतों में फल और चारा पत्ती प्रजाति के पौधे रोपे जाएंगे। पौधे सरकार निशुल्क उपलब्ध कराएगी। ग्रामीण पौधों की डिमांड वन विभाग, ग्राम विकास अधिकारी अथवा खंड विकास कार्यालय में उपलब्ध करा दें।
हरेले के दिन जिले के अधिकारी, विधायक, मंत्री और अधिकारी को किसी भी एक गांव में पहुंचकर ग्रामीणों के साथ पौध रोपण करना होगा। इसके बाद गांव में हरेला प्रतियोगिता होगी।
प्रधान, उप प्रधान, वन पंचायत सरपंच आदि की गठित कमेटी जिस महिला के हरेले को सर्वोत्तम घोषित करेगी उसे सरकार से एक साल तक हर महीने 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
विधायक और बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल और संसदीय सचिव मनोज तिवारी ने भी सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। इस मौके पर डीएम विनोद कुमार सुमन, पालिकाध्यक्ष प्रकाश जोशी आदि मौजूद थे।
सीएम के औद्योगिक सलाहकार रणजीत रावत ने कहा कि अब पहाड़ के जंगलों से वन निगम द्वारा काटी जाने वाली लकड़ी का नीलाम स्थानीय स्तर पर किया जाएगा, ताकि लोगों को कम धनराशि में ईमारती लकड़ी मिल सके। उन्होंने कहा कि पहले चरण में जिला मुख्यालयों में लकड़ी डिपो खोले जाएंगे।
इसके बाद तहसील स्तर पर भी व्यवस्था करने की योजना है। श्री रावत ने कहा कि पहाड़ में छोटे उद्योगों की स्थापना को सरकार ने नीति तैयार कर दी है। इसके तहत पहाड़ी जिलों में इकाईयां लगाने पर काफी अनुदान भी मिलेगा।
मेरा गांव मेरा धन योजना के तहत भी समर्थ लोग सरकारी भवनों के निर्माण पर निवेश कर सकते हैं। इसके एवज में पूंजी लगाने वाले को सरकार बैंक द्वारा एफडी में दिए जाने वाले ब्याज से दो फीसदी अधिक का भुगतान करेगी।