अभी तक आपने लोगों को मंदिरों में जाकर अपनी मुरादें मांगते देखा होगा, लेकिन उत्तराखंड के अल्मोड़ा और नैनीताल जिले में स्थित गोलू देवता के मंदिर में केवल चिट्ठी भेजने से ही मुराद पूरी हो जाती है। इतना ही नहीं गोलू देवता लोगों को तुरंत न्याय दिलाने के लिए भी प्रसिद्घ हैं। इस कारण इन्हें न्याय का देवता भी कहा जाता है।
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की परीक्षा में हुई धांधली और विधानसभा में हुई बैक डोर भर्तियों के विरोध में युवाओं ने चितई स्थित प्रसिद्ध ग्वल देवता मंदिर में न्याय की गुहार लगाई। युवाओं ने कुमाऊंनी में अर्जी लिखकर मंदिर में चढ़ाई। उन्होंने लिखा कि हे गोलज्यू अब तुमी न्याय करिया।
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युवाओं के अनुसार युवा बेरोजगारी से जूझ रहा है। रोजगार न मिलने से वे हताश और निराश हैं। उत्तराखंड में नौकरियां रेवड़ियों की तरह बांटी जा रही है, इससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है। युवाओं ने पेपर लीक और विधानसभा भर्तियों में हुए घोटालों की सीबीआई जांच, परीक्षा का कैलेंडर जारी करने, घोटाले से प्रभावित आयु सीमा पार कर चुके अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट प्रदान करने की भी मांग की। इस मौके पर आशीष पंत, भास्कर भौर्याल, कामेश कुमार, प्रेम कुमार, मनोज भट्ट, लीला देवी, ज्योति भट्ट आदि मौजूद रहीं।
यूकेएसएसएससी के पेपर लीक प्रकरण से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों बच्चों की मेहनत बर्बाद हो गई है। पेपर लीक प्रकरण में सभी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
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-सीमा नेगी, अल्मोड़ा
प्रतियोगी परीक्षाओं की लंबे समय से तैयारी कर रही हूं। आयोग की परीक्षा होने का इंतजार था लेकिन पेपर लीक प्रकरण से झटका लगा है। आयोग को परीक्षा प्रणाली में सुधार करने की जरूरत है।
- गरिमा नेगी, अल्मोड़ा
यूकेएसएसएससी की परीक्षा में हुई धांधली और विधानसभा में हुई बैक डोर भर्तियों की सीबीआई जांच होनी चाहिए। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का अधिकार किसी को नहीं है।
यूकेएसएसएससी पेपर लीक प्रकरण से परीक्षाओं की तैयारी में जुटे युवाओं की तैयारी पर असर पड़ा है। युवा असमंजस में हैं कि पेपर होगा या नहीं।
-मोनिका आर्या, अल्मोड़ा