राज्य आंदोलनकारियों को राज्य निर्माण सेनानी घोषित करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों ने बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट में धरना दिया और नारेबाजी की। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार अपने लोगों को लाभ पहुंचा रही है लेकिन राज्य आंदोलनकारियों की मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य में बारी-बारी से सत्ता में आई भाजपा और कांग्रेस सरकारों ने अपने-अपने कार्यकर्ताओं को राज्य आंदोलनकारी बनाने और उन्हें विभिन्न तरीकों से लाभान्वित करने का ही कार्य किया है। जबकि राज्य आंदोलन के लिए जेल जाने वाले वास्तविक राज्य आंदोलनकारी चिन्हित होने के लिए भटक रहे हैं। आंदोलनकारियों के लिए क्षैतिज आरक्षण तक मंजूर नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने कार्यकर्ताओं को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है लेकिन राज्य आंदोलनकारियों को किसी प्रकार की सहायता का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
उन्होंने रामनगर में प्रभात ध्यानी और मुनीस कुमार पर खनन माफियाओं द्वारा किए गए हमले की तीव्र निंदा करते हुए हमलावरों को शीघ्र गिरफ्तार करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार माफियाओं को तो संरक्षण दे रही है। माफियाओं के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न किया जा रहा है।
धरने में महेश परिहार, ब्रह्मानंद डालाकोटी, किशोरी लाल वर्मा, एलडी शर्मा, वसंत जोशी, काशी दत्त पेटशाली, पूरन चंद्र ममगई, शंकर दत्त डालाकोटी, गोपाल सिंह गैड़ा, नवीन राम, दिनेश लोहनी, भुवन चंद्र डालाकोटी, मदन राम, देव सिंह, कैलाश राम, लछम सिंह, दन राम, शिवराज बनौला आदि बैठे।