अल्मोड़ा के चौकुना में शोभा यात्रा के दौरंन मूर्व्ति विसरेजन को जाती महिलाएं।
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जैंती (अल्मोड़ा)। तहसील के ग्राम पंचायत चौकुना में आयोजित सात दिवसीय गौरा महोत्सव (गंवरा) के समापन पर मां गौरा और महेश के डोले की शोभायात्रा निकली। शोभायात्रा में महिलाएं मां गौरा (पार्वती) और महेश (भगवान शिव) के जयकारे लगाती चल रही थीं। तालगौं स्थित देवी मंदिर में मूर्तियों को विसर्जित किया गया।
गौरा महोत्सव में महिलाओं ने व्रत रखकर मां गौरा और भगवान महेश की मूर्तियों को गोद में लेकर उन्हें झुलाया। मूर्तियों को झुलाते हुए महिलाओं ने होली रे बाला-होली रे होल्यारी बाला होरी रे.. दे गंवरा देवी हो छुम घुंघुरू छुम को बाजो त्वे गंवरा झुलूनों हो छुम को बाजो आदि गौरा महोत्सव के गीत गाए।
व्रतधारी महिलाओं ने गौरा और महेश की मूर्तियों को गोद में उठाकर नृत्य किया। महिलाओं ने खोल दे माता खोल भवानी धरम केवाड़... आदि कुमाऊंनी झोड़ा भी गाया। उपप्रधान राजेंद्र सिंह धानक राजू ने बताया कि यदि निसंतान महिलाएं नियमपूर्वक गौरा और शिव की मूर्तियों को गोद में उठाकर नृत्य करती हैं तो उन्हें संतान की प्राप्ति होती है, जबकि कुंवारी कन्याओं को अच्छा पति मिलता है। ऐसी मान्यता है। महिलाओं द्वारा उपवास रखकर धान, गेहूं के पौध के सूखे तिनकों से मां गौरा, महेश की मूर्तियां बनाई जाती हैं। महिलाओं ने पहली बार निजी खर्चे से भंडारा किया। इसमें कई लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। देव डांगर लीला देवी और नंदी देवी ने लोगों को आशीर्वाद दिया। शोभायात्रा में पूर्व प्रधान जानकी धानक, जीवंती देवी, लीला देवी, पार्वती, देवी, मीना देवी, बसंती देवी, जानकी देवी, उमा देवी, बचुली धानक आदि आदि थीं। समापन पर सैनोली, नौगांव, कनोली, बरम, नैगाड़, धनखोली आदि गांवों की महिलाएं भी पहुंची थी।