मानव उत्थान सेवा समिति की ओर से महिलाओं ने बाजार में भव्य सद्भावना कलश यात्रा निकाली। बाद में भंडारे और प्रसाद वितरण के साथ सद्भावना सम्मेलन का समापन हुआ। इस मौके पर बदरीनाथ से पहुंचे महात्मा सत्यबोधानंद ने लोगों को संबोधित करते हुए मानव धर्म को सर्वोच्च बताया।
हंस विभू आश्रम भिकियासैंण में सद्भावना सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वेद, पुराण, कुरान, बाइबिल, रामायण और गीता में भी मानव धर्म को सर्वोच्च माना गया है। उन्होंने कहा हम किसी धर्म संप्रदाय से पहले मानव हैं। इसलिए मानवतावादी होकर समाज में सद्भावना को विकसित करने का लक्ष्य मुख्य होना चाहिए।
उन्होंने भौतिकवादी समाज में मानवीय मूल्यों में हो रहे लगातार ह्रास पर चिंता जताते हुए मानवता को एकता के सूत्र में पिरोने का आह्वान किया। इससे पूर्व मानव उत्थान सेवा समिति के पदाधिकारियों ने केदारनाथ, बदरीनाथ, हरिद्वार से पहुंचे महात्माओं की अगुवाई में सद्भावना कलश यात्रा निकाली। जिसमें समिति के सदस्यों और गॉड ग्रेस के स्कूली बच्चों ने भागीदारी की।
सम्मेलन का समापन भंडारे और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। इस मौके पर महात्मा ज्ञानप्रकाशानंद, सत्यबोधानंद, पुष्पाबाई, मंजरि बाई, जगतसिंह, बागसिंह, धनीराम, रमेशचंद्र, नवीन ध्यानी, नंदकिशोर, ललित प्रसाद, प्रेमबल्लभ ,दिवानसिंह,भगवतसिंह, इंद्रसिंह, गंगंगादत्त, पुष्पा, बीना, राकेश, नंदू ध्यानी, गोवर्धन,गोपालनाथ,गीता गोस्वामी आदि मौजूद थे।