रानीखेत (अल्मोड़ा)। ब्रिटिशकालीन पर्यटन नगरी में सैलानियों की आमद बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। पर्यटन नगरी में भालू डैम विकसित नहीं हो सका है। दलमोटी में मिनी अभ्यारण्य का काम शुरू नहीं हो सका है। साहसिक पर्यटन के लिए पर्यटन रूटों का भी विकास नहीं हुआ है। यह सब मुख्यमंत्री की घोषणा में शामिल हैं। यदि इनका विकास हो जाए तो पर्यटकों की आमद बढ़ सकती है। नए पर्यटक स्थल तो दूर, पुराने पर्यटक स्थलों को ही विकसित नहीं किया गया है, जबकि वर्षभर यहां हजारों की तादात में पर्यटक पहुंचते हैं।
मनोरंजन के साधनों के अभाव में कई बार पर्यटक नैनीताल से रानीखेत होते हुए अन्यत्र चले जाते हैं। स्थानीय नागरिक भी कई बार नए पर्यटक स्थल विकसित करने की मांग कर चुके हैं। 1869 में अंग्रेजों ने जब यहां छावनी बसाई, मनोरम, शांत वातावरण होने के कारण तभी से पर्यटकों का रुझान रानीखेत की तरफ बढ़ने लगा। देखते ही देखते हर साल यहां हजारों की तादाद में देशी-विदेशी सैलानी पहुंचने लगे।
रानीखेत में विश्व विख्यात गोल्फ मैदान, चौबटिया का उद्यान गार्डन, हैड़ाखान मंदिर, कालिका मंदिर, झूला देवी मंदिर सहित कई पर्यटक स्थल हैं, लेकिन नए पर्यटक स्थल विकसित नहीं हो सके और न ही मनोरंजन के साधनों का विकास हो सका। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पहले के मुकाबले अब यहां पर्यटक कम पहुंच रहे हैं। यदि मनोरंजन के साधनों का विकास हो तो पर्यटकों की आमद यहां बढ़ सकती है।
इस साल जनवरी में यहां 8506, भारतीय, 102 विदेशी, फरवरी में 9301 देशी, 118 विदेशी, मार्च में 10209 देशी, 128 विदेशी, अप्रैल में 4724 देशी, 51 विदेशी पर्यटक पहुंच चुके हैं। मई के आंकड़े अभी नहीं आए हैं। जिला पर्यटन अधिकारी कीर्ति चंद्र का कहना है कि पर्यटन विकास के लिए शासन स्तर पर कई प्रस्ताव भेजे गए हैं।