रानीखेत (अल्मोड़ा)। राज्य बनने के बाद भी पर्वतीय क्षेत्र के गांवों तक विकास की किरण नहीं पहुंच सकी है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में कई गांव पलायन की पीड़ा झेल रहे हैं। पलायन को रोकने के लिए तमाम दावे हो रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री हरीश रावत का पड़ोसी गांव पंतगांव ही पलायन की त्रासदी झेल रहा है।
पांच सौ परिवारों वाला यह गांव कभी उपमंडल क्षेत्र का सबसे बड़ा गांव था, अब गांव में कुल 90 परिवार रह गए हैं। यहां जंगली जानवरों के आतंक के चलते लोग खेती बाड़ी छोड़ रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर अदद एएनएम सेंटर तक नहीं है।
रानीखेत-रामनगर मोटर मार्ग पर भतरौंजखान के पास पंतगांव है। यह गांव मुख्यमंत्री हरीश रावत के मोहनरी गांव से लगा हुआ है। बताते हैं कि कभी यहां 500 परिवार रहते थे। लोग खेती कर जीवनयापन करते थे, लेकिन पिछले तीन चार दशकों से लगातार पलायन हो रहा है।
जिस कारण अब यहां सिर्फ 90 परिवार ही रह गए हैं, गांव में अधिकांश बूढ़े बुजुर्ग हैं। पलायन का मुख्य कारण जंगली जानवरों का आतंक है। जिस कारण लोग खेती से विमुख होकर रोजी-रोटी की तलाश में मैदानी क्षेत्र में जाकर बस रहे हैं। यह गांव आरक्षित वन से घिरा है, जिस कारण सुअर और बंदर ग्रामीणों की खेती को तबाह कर रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं का भी गांव में अभाव है। मामूली उपचार के लिए भी ग्रामीणों को 25 से 30 किमी दूर भिकियासैंण या रानीखेत जाना पड़ता है। गांव में शिक्षा, पेयजल की काफी व्यवस्था है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगली जानवरों के आतंक के अलावा गांव में कालाबांसा और गाजर घास उग गई है। इससे चारे को नुकसान हो रहा है।
बंदर ग्रामीणों की सब्जियों को तहस-नहस कर रहे हैं। प्रधान चंद्रशेखर पंत ने बताया कि जंगली जानवरों के आतंक के चलते ही अधिकांश लोगों ने खेती छोड़ रहे हैं। जो लोग गांव में हैं वह अपनी ओर से जंगली जानवरों से खेतों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने गांव को जोड़ने वाले तितालीखेत मोटर मार्ग की दशा सुधारने की भी मांग की है।
रानीखेत। वन पंचायत विकास समिति के प्रदेश प्रवक्ता गैरगांव निवासी भूपाल भंडारी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने पंतगांव से लगे तितालीखेत के जंगल को ईको टूरिज्म के रूप में विकसित करने की घोषणा की है, इसके साथ साथ आय के संसाधन भी विकसित होने चाहिए।
इसके लिए पंतगांव स्थित पंत पार्क के पास मिनी जू बनाया जाए, साथ ही 1837 में स्थापित चमु देवता के मंदिर का सुंदरीकरण भी होना चाहिए। इससे यहां आने वाले पर्यटकों का रुझान बढ़ेगा।