पालीडुंगरा ऐठान के जंगल को भगवती माता को सौंपते लोग।
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तर्ज पर पालीडुंगरा के ग्रामीणों ने भी पेड़ों को बचाने की पहल की है। उन्होंने छह हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जंगल में बांज और चीड़ के पेड़ों की सुरक्षा का जिम्मा खुद उठाया है। ग्रामीणों ने बैठक कर पूरे जंगल को आदि शक्ति भगवती माता को समर्पित कर इसे बचाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि 10 साल तक ग्रामीण जंगल की घास तो काटेंगे मगर पेड़ों को हाथ नहीं लगाएंगे। पर्यावरण की सुरक्षा के लिए शुरू किए गए इस अभियान को लेकर ग्रामीणों में उत्साह देखा गया।
बुधवार को गांव का नजारा देखने लायक था। ढोल नगाड़ों के साथ गांव के लोग जंगल पहुंचे और पेड़ों पर भगवती के नाम के ध्वज बांध दिए। पूरा वन क्षेत्र माता के जयकारों से गूंज उठा। ग्रामीणों ने जंगल की रक्षा की प्रार्थना भी की। इससे पहले ऐठान में हुई बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि पालीडुंगरा के जंगल को असामाजिक तत्व तबाह करने में लगे हैं। बांज और चीड़ के पेड़ों को काटा जा रहा है। पेड़ों के अंधाधुंध कटान से पर्यावरण को गंभीर खतरा हो रहा है। पानी के स्रोत भी सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं। यदि पेड़ों के कटान का विरोध वे करते भी हैं तो कोई सुनने को तैयार नहीं रहता। यदि ऐसा ही रहा तो जंगल का नामोनिशान ही मिट जाएगा। बैठक में प्रस्ताव पारित कर बैठक में एकमत से निर्णय लिया कि जंगल को दस साल तक माता भगवती को अर्पित कर दिया जाए। अब वह ही पेड़ों की रक्षा करेंगी।
अध्यक्षता कर रहे हास्य कलाकार लक्ष्मण सिंह ऐठानी ने कहा कि संकल्प की जा अवधि तय की गई है उस दौरान ग्रामीण जंगल से घास काटने के अलावा वह सूखे पत्ते और सूखी घास ला सकते हैं। लेकिन पेड़ों पर किसी किस्म के हथियार नहीं चला सकते हैं। बैठक में गणेश सिंह ऐठानी, जमन सिंह, भूपाल सिंह, दीवान सिंह, प्रेम सिंह, सुुंदर सिंह, भूपाल और धाम सिंह ऐठानी, सभासद सास्वती देवी, दीपा, गंगा, गीता और हरूली आदि शामिल थे।