बरसाती नालों से होने वाले भू कटाव को रोकने के उद्देश्य से वन विभाग ने पिरूल से चेक डैम बनाने का कार्य शुरू दिया है। गनियाद्योली रेंज से इसकी शुरुआत की गई है।
पिरूल निर्मित चेक डैमों को आरसीसी से निर्मित डैमों की अपेक्षा अधिक मजबूत और किफायती माना जा रहा है। जिस स्थान पर डैम बनाए जा रहे हैं, वहीं पर जैट्रोफा, सिंवाली आदि झाड़ीनुमा पौधे भी रोपे जा रहे हैं। एक चेक डैम बनाने में तीन क्व़िटल पिरूल सहित कुल दो हजार रुपये की लागत आती है।
वन विभाग ने पिरूल से बने चेक डैम पर अधिक विश्वास जताया है। बड़े नालों के लिए भी पिरूल निर्मित डैम काफी कारगर बताए जा रहे हैं। कैंपा और जायका योजना के तहत पिरूल की बुनाई के लिए नारियल की रस्सी का प्रयोग हो रहा है। इसके अलावा बाजार से लोहे का मजबूत जाल खरीदना पड़ रहा है।
इसमें कुल दो से तीन हजार रुपये की लागत आती है। जबकि सीमेंट से डैम बनाने के लिए 15 हजार रुपये का खर्च आता है। बरसात के दौरान नालों से बहने वाला मलबे को पिरूल सोख लेता है।
गनियाद्योली कंपाट नंबर दो और तीन में 37 पिरूल के चेक डैम बनाए गए हैं। जैट्रोफा, सिंवाली, पॉपुलर सहित कई पौधों का रोपण भी डैम में हो रहा है। इससे डैम को और मजबूती मिलेगी। क्षेत्र की संवेदनशील पहाड़ियों पर भी डैम बनाने का लक्ष्य है।